वाहनों के टायर में हवा कम होने से हर साल 4,500 करोड़ रुपये के ईंधन का नुकसान : एटीएमए

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वाहनों के टायर में हवा कम होने से हर साल 4,500 करोड़ रुपये के ईंधन का नुकसान : एटीएमए

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 05:40 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 05:40 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) भारत में वाहनों के टायर में कम हवा होने के कारण हर साल 4,500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 42 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल का नुकसान हो रहा है। उद्योग संगठन एटीएमए के एक अध्ययन में यह बात सामने आई।

वाहन टायर विनिर्माता संघ (एटीएमए) की तकनीकी इकाई इंडियन टायर टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (आईटीटीएसी) के अध्ययन में सामने आया कि भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिनके टायर में हवा यात्री वाहन विनिर्माता द्वारा अनुशंसित स्तर से कम होती है। इससे ईंधन की भारी बर्बादी, वाहन रखरखाव लागत में वृद्धि और सड़क सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं।

एटीएमए ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में 1.3 लाख से अधिक यात्री वाहनों (जिनमें दोपहिया वाहन भी शामिल हैं) के टायर की जांच की गई। इनमें से लगभग एक लाख टायर जांच केवल पिछले वर्ष के दौरान की गई।

इसमें कहा गया, ‘‘ निष्कर्षों से पता चला कि 32 प्रतिशत टायर में हवा अनुशंसित स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक कम थी। वहीं 21 प्रतिशत टायर में हवा अनुशंसित स्तर से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत कम पाई गई।’’

अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला देते हुए एटीएमए ने कहा कि टायर में हर एक पीएसआई (पाउंड प्रति वर्ग इंच) की कमी से ईंधन दक्षता लगभग 0.2 प्रतिशत घट जाती है।

सर्वेक्षण के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर एटीएमए का अनुमान है कि टायर में हवा कम होने कारण भारत के कुल वाहन ईंधन उपभोग के बराबर 0.75 प्रतिशत ईंधन क्षमता का नुकसान हो रहा है।

एटीएमए ने कहा, ‘‘ भारत में वार्षिक पेट्रोल खपत लगभग 56.77 अरब लीटर आंकी गई है और इसका लगभग पूरा उपयोग यात्री वाहनों (जिनमें दोपहिया वाहन भी शामिल हैं) द्वारा किया जाता है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 42.57 करोड़ लीटर पेट्रोल का नुकसान हो रहा है। मौजूदा खुदरा ईंधन कीमतों के आधार पर इस बर्बाद ईंधन का मूल्य 4,500 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।’’

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान केवल पेट्रोल खपत से संबंधित है और इसमें डीजल, सीएनजी या एलपीजी से चलने वाले वाहन शामिल नहीं हैं।

एटीएमए ने कहा, ‘‘ इसलिए टायर में कम हवा होने के कारण देश को होने वाला वास्तविक ईंधन नुकसान इससे भी अधिक होने की संभावना है।’’

आईटीटीएसी के चेयरमैन रेनजी इसाक ने अध्ययन पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘ यह सर्वेक्षण घरेलू बजट और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले एक छिपे लेकिन महत्वपूर्ण बोझ को उजागर करता है। ’’

उन्होंने कहा कि टायर में कम हवा से उत्सर्जन भी बढ़ता है, जिससे वायु प्रदूषण अधिक होता है।

एटीएमए सेफ्टी अवेयरनेस ग्रुप के चेयरमैन सुदर्शन एस. गुसैन ने कहा कि आर्थिक नुकसान के अलावा टायर में कम हवा से सुरक्षा को भी गंभीर खतरा है।

गुसैन ने कहा कि टायर में कम हवा से वे असमान रूप से घिसते हैं, जिससे वे ज्यादा समय तक नहीं चलते और और बदलने की भी लागत बढ़ जाती है।

भाषा निहारिका अजय

अजय