सीडैक झारखंड में एआई-आधारित विशिष्ट कृषि परियोजना का संचालन करेगा

सीडैक झारखंड में एआई-आधारित विशिष्ट कृषि परियोजना का संचालन करेगा

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 09:01 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 09:01 PM IST

कोलकाता, नौ जनवरी (भाषा) सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडैक) झारखंड में सूक्ष्म और छोटे किसानों की मदद के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करेगा। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने शुक्रवार को बताया कि इस परियोजना के तहत उपग्रह चित्रों और मौसम के आंकड़ों पर आधारित एआई-संचालित ‘विशिष्ट कृषि मॉडल’ का उपयोग करके किसानों को मुफ्त सलाह दी जाएगी।

सीडैक के वैज्ञानिक आलोकेश घोष ने ‘एआई इन एग्रीकल्चर’ कार्यक्रम के मौके पर पीटीआई-भाषा को बताया कि इस परियोजना के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि इस प्रायोगिक परियोजना का मकसद पानी की कमी, मिट्टी के क्षरण और कृषि लागत (बीज, खाद आदि) के सही इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। खास बात यह है कि इसके लिए किसानों को महंगे भौतिक सेंसर में निवेश करने की जरूरत नहीं होगी।

यह कार्यक्रम फरवरी में होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से पहले का एक आयोजन था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार इस शिखर सम्मेलन को कृत्रिम मेधा (एआई) पर ‘वैश्विक दक्षिण’ के पहले शिखर सम्मेलन के रूप में देखा जा रहा है और इसमें लगभग 100 देशों के शामिल होने की उम्मीद है।

घोष ने कहा कि प्रस्तावित प्रणाली एक कम लागत वाला, क्लाउड आधारित निर्णय समर्थन मंच है। यह उपग्रह चित्र, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से मिली मौसम संबंधी जानकारी, मिट्टी के स्वास्थ्य और जमीनी स्तर के आंकड़ों को जोड़कर स्थान-विशिष्ट सलाह तैयार करता है।

झारखंड परियोजना की एक मुख्य विशेषता पंचायत स्तर पर सूक्ष्म-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान है। इसमें पांच गुणा पांच वर्ग किलोमीटर का ग्रिड रिजॉल्यूशन होगा, जिससे अत्यंत स्थानीय और फसल-विशिष्ट परामर्श देना संभव होगा।

इस प्रणाली के लिए किसानों को अपने खेत की सीमाओं को ‘जियो-टैग’ करना होगा और फसल के प्रकार एवं बुआई की तारीख जैसे बुनियादी विवरण देने होंगे। इसके बाद एआई और मशीन लर्निंग मॉडल डिजिटल मंच और एसएमएस के माध्यम से सिंचाई, उर्वरक और पोषक तत्व प्रबंधन पर लघु, मध्यम और दीर्घकालिक मौसम-आधारित परामर्श तैयार करेंगे।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण