नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के प्रवर्तकों चेतन और नितिन संदेसरा से जुड़े मामले में सुरक्षित ऋणदाताओं के एक समूह ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 5,100 करोड़ रुपये के जमा धन के वितरण का अनुरोध किया है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई वाले बैंकों के इस गठजोड़ ने कहा है कि स्टर्लिंग समूह की विभिन्न कंपनियों पर उनका कुल बकाया 19,283.77 करोड़ रुपये है।
न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और ए. एस. चांदुरकर की पीठ ने बैंकों के गठजोड़ की तरफ से दायर संयुक्त याचिका को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की है।
याचिका में कहा गया है कि बैंकों के दावे स्टर्लिंग समूह की 10 कंपनियों से जुड़े हैं, जिनमें स्टर्लिंग बायोटेक, स्टर्लिंग ऑयल रिसोर्सेज और स्टर्लिंग एसईजेड लिमिटेड शामिल हैं।
बैंकों ने कहा है कि आपसी सहमति से एकसमान फार्मूला अपनाकर कुल देनदारी तय की गई है और 5,100 करोड़ रुपये के वितरण का तरीका भी निर्धारित किया गया है।
इस फॉर्मूले के तहत विदेशी ऋण को 63 रुपये प्रति डॉलर की विनिमय दर से रुपये में बदला गया और गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित होने की तिथि से इस पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी जोड़ा गया। पहले वसूली जा चुकी रकम को समायोजित करने के बाद कुल देनदारी 19,283.77 करोड़ रुपये आंकी गई।
बैंकों ने प्रस्ताव दिया है कि जमा राशि का वितरण प्रत्येक बैंक के हिस्से के हिसाब से आनुपातिक आधार पर किया जाए। मसलन, यदि किसी बैंक की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है तो उसे 5,100 करोड़ रुपये में से उतना ही हिस्सा मिलेगा।
याचिका में अलग-अलग बैंकों के जोखिम और वितरण पूल में उनकी हिस्सेदारी का विस्तृत ब्योरा भी शामिल किया गया है।
शीर्ष अदालत ने नवंबर, 2025 में संदेसरा बंधुओं के 5,100 करोड़ रुपये जमा करने के प्रस्ताव को अंतिम निपटान के रूप में स्वीकार किया था, जिसके बाद यह राशि दिसंबर, 2025 में जमा करा दी गई थी।
बैंकों के समूह ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि सहमति वाले इस फार्मूले के अनुरूप 5,100 करोड़ रुपये को बांटे जाने की मंजूरी दी जाए और राशि का भुगतान याचिका में बताए गए संबंधित बैंक खातों में किया जाए।
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