क्रेडाई ने बजट में राष्ट्रीय किराया आवास मिशन शुरू करने की मांग की

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क्रेडाई ने बजट में राष्ट्रीय किराया आवास मिशन शुरू करने की मांग की

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  • Publish Date - January 24, 2026 / 05:06 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 05:06 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) देश में रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने सरकार से आगामी आम बजट में राष्ट्रीय किराया आवास मिशन शुरू करने की मांग की है। निकाय ने सुझाव दिया है कि इस मिशन के तहत डेवलपर्स और किरायेदारों, दोनों को कर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

क्रेडाई ने अपने बजट पूर्व सुझावों में किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और 45 लाख रुपये की मूल्य सीमा को संशोधित करने की मांग भी दोहराई। इसके अलावा, एसोसिएशन ने आवास ऋण के ब्याज पर मिलने वाली कर कटौती की सीमा को वर्तमान दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का आग्रह किया है।

क्रेडाई ने कहा, ”तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण प्रवासी लोगों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन संगठित किराया आवास क्षेत्र अब भी अविकसित है।” एसोसिएशन ने सिफारिश की है कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में बड़े पैमाने पर किफायती किराये के मकान विकसित करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए। इससे किराया बाजार औपचारिक बनेगा और अनधिकृत बस्तियों के प्रसार पर रोक लगेगी।

क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा, ”आर्थिक वृद्धि, रोजगार और शहरी बदलाव के लिए आवास क्षेत्र एक महत्वपूर्ण इंजन है। भारत के तेजी से होते शहरीकरण के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक मजबूत किराया आवास पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना बेहद आवश्यक है।”

निकाय ने इस बात पर जोर दिया कि किफायती आवास के मानक वर्ष 2017 से नहीं बदले गए हैं। वर्तमान में मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर और अन्य शहरों में 90 वर्ग मीटर के साथ 45 लाख रुपये की सीमा तय है, जो बढ़ती जमीन और निर्माण लागत के कारण अब व्यावहारिक नहीं रह गई है।

क्रेडाई ने ‘कारपेट एरिया’ के मानकों में बदलाव कर महानगरों के लिए इसे बढ़ाकर 90 वर्ग मीटर तथा अन्य शहरों के लिए 120 वर्ग मीटर करने के साथ ही 45 लाख रुपये की मूल्य सीमा को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव रखा है।

आम बजट पर गौर्स समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मनोज गौड़ ने रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान देता है और रोजगार पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

सत्वा समूह के उपाध्यक्ष शिवम अग्रवाल ने इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) की स्थापना हेतु ‘एकल खिड़की निपटान’ व्यवस्था की मांग की।

भाषा सुमित पाण्डेय

पाण्डेय