नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने पिछले कुछ साल में सूक्ष्म और लघु उद्यमों को 13 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार एमएसएमई को भुगतान में देरी पर नजर रख रही है क्योंकि यह इस क्षेत्र के लिए एक ‘बड़ी समस्या’ बनी हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) मई, 2020 में शुरू की गई थी ताकि पात्र एमएसएमई और उद्यमों को कोविड-19 महामारी के कारण हुए व्यवधान के बीच अपने कामकाज से जुड़े खर्चों को पूरा करने और कारोबार फिर से शुरू करने में मदद मिल सके।
एमएसएमई सचिव भरत खेड़ा ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इससे एमएसएमई क्षेत्र में ऋण का प्रवाह काफी बढ़ गया है। लगभग 10-11 साल पहले, वर्ष 2014 में, एमएसएमई क्षेत्र में ऋण का प्रवाह 10 लाख करोड़ रुपये था। आज यह 37 लाख करोड़ रुपये है। इसमें (लगभग) 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, ऋण वित्तपोषण के अलावा, इक्विटी वित्तपोषण भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।’’
यह देखते हुए कि भुगतान में देरी एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक ‘बड़ी समस्या’ रही है, खेड़ा ने कहा, ‘‘हमने एमएसएमई को तय 45 दिन की अवधि से ज्यादा समय तक भुगतान में देरी होने पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है ताकि एमएसएमई को इस वजह से भी कोई नुकसान न हो।’’
भाषा राजेश राजेश अजय
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