ऊर्जा कीमतों के झटकों के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी संवेदनशील: आरबीआई

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ऊर्जा कीमतों के झटकों के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी संवेदनशील: आरबीआई

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 06:55 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 06:55 PM IST

मुंबई, 30 जून (भाषा) आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों को दूर करने में होने वाली देरी और भंडार को दोबारा भरने के लिए बढ़ती मांग के कारण यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को यह बात कही।

आरबीआई ने अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा कि भारत की मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती है।

सभी वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हालांकि, आयातित तेल और अन्य प्रमुख जिंसों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा की कीमतों के झटकों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों का असर पड़ सकता है।’

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुईं दिक्कतें कम हो रही हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली अब भी वैश्विक तनाव और उससे जुड़े झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है।

रिपोर्ट कहती है कि पूंजी प्रवाह में नरमी के कारण पूंजी खाते पर दबाव बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 95 अरब अमेरिकी डॉलर के मजबूत स्तर पर रहा। हालांकि, विदेशी निवेशकों द्वारा मुनाफे की अधिक निकासी और भारतीय कंपनियों के विदेशों में बढ़ते निवेश के कारण शुद्ध एफडीआई प्रवाह अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

हालांकि, शुद्ध एफडीआई में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। अप्रैल, 2026 में शुद्ध एफडीआई प्रवाह 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर था।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में शुद्ध एफडीआई का प्रवाह वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों से प्रभावित होता है। इसलिए हाल में शुद्ध एफडीआई में आई गिरावट का एक कारण वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना भी हो सकता है।

भाषा योगेश अजय

अजय