नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) नीति आयोग ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता एवं वैश्विक स्थिति मजबूत करने के लिए शुल्क घटाने, दोतरफा व्यापार बढ़ाने और यात्री वाहनों जैसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों की तरफ उत्पादन केंद्रित करने जैसे रणनीतिक कदमों की जरूरत है।
आयोग ने अप्रैल–जून 2025 अवधि के लिए जारी तिमाही रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण में कहा कि गुणवत्ता मानकों, सत्यापन प्रणालियों और प्रौद्योगिकी अपनाने में मजबूती लाने के साथ ही वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में आगे के जुड़ाव को बढ़ावा देना अहम होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, “प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक स्थिति बेहतर करने के लिए भारत को शुल्क में कमी, दोतरफा व्यापार एवं सीमा-पार मंचों में भागीदारी बढ़ाने और यात्री वाहन जैसे अधिक मांग वाले खंड की ओर उत्पादन को मोड़ने जैसे रणनीतिक कदम उठाने होंगे।”
इस रिपोर्ट में भारत के व्यापार में उभरते संरचनात्मक बदलावों को भी रेखांकित किया गया है। इनमें प्रौद्योगिकी-आधारित निर्यात का बढ़ता योगदान, सेवाओं के नेतृत्व वाली वृद्धि और आयात संरचना में बदलाव शामिल हैं, जो वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत के गहरे एकीकरण को दर्शाते हैं।
इस तिमाही रिपोर्ट के विषयवार खंड में भारत के वाहन निर्यात पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें वैश्विक मांग रुझान, वाहन और वाहन कलपुर्जों में भारत की निर्यात उपस्थिति, शुल्क संरचना, उद्योग-आंतरिक व्यापार और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी का विश्लेषण किया गया है।
इसके साथ प्रतिस्पर्धा और निर्यात प्रदर्शन को मजबूत करने से जुड़ी चुनौतियों एवं नीतिगत प्राथमिकताओं की पहचान की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने वाहन निर्यात के कुछ खास खंडों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन 2.2 लाख करोड़ डॉलर के बढ़ते वैश्विक वाहन निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अभी भी काफी गुंजाइश है।
नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि खासकर वाहन जैसे क्षेत्रों में निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना दीर्घकालिक वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए बेहद जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल–जून 2025 के दौरान वैश्विक वस्तु एवं सेवा व्यापार में तिमाही आधार पर लगभग 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस बढ़त को मुख्य रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं और दक्षिण-दक्षिण व्यापार में तेजी से समर्थन मिला, हालांकि अमेरिका के व्यापार प्रदर्शन का वैश्विक औसत पर कुछ दबाव रहा।
भारत की कुल व्यापार स्थिति वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में स्थिर रही। इस दौरान माल और सेवा व्यापार 3.5 प्रतिशत बढ़कर 439 अरब डॉलर पहुंच गया।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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