आईएफएससीए नियमन से पूंजी की लागत न बढ़ने देने के लिए प्रयासरतः चेयरपर्सन

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आईएफएससीए नियमन से पूंजी की लागत न बढ़ने देने के लिए प्रयासरतः चेयरपर्सन

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 04:40 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 04:40 PM IST

मुंबई, 20 अगस्त (भाषा) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) के चेयरपर्सन के. राजारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्राधिकरण यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि नियामकीय अनुपालन का बोझ पूंजी की लागत में वृद्धि का कारण न बने।

राजारमण ने उद्योग मंडल एसोचैम के ‘नौवें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन एवं कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पर पुरस्कार समारोह’ को संबोधित करते हुए कहा कि आईएफएससीए इस बात पर भी ध्यान दे रहा है कि बाजार में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी नियमन ही हो और इससे पूंजी की लागत कम करने में मदद मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘कानून, नियमन और कारोबार करने की लागत से पैदा होने वाली सभी अड़चनों को दूर करना होगा, ताकि कॉरपोरेट क्षेत्र तक पहुंचने वाली पूंजी लागत-कुशल हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें तमाम अड़चनें हैं। कानून अड़चन पैदा करता है, नियमन अड़चन पैदा करता है और कारोबार करने की लागत भी अड़चन पैदा करती है। इन सभी अड़चनों को दूर करना होगा, ताकि कॉरपोरेट क्षेत्र तक पहुंचने वाली पूंजी कम लागत वाली हो।’’

राजारमण ने कहा कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर विस्तार करना और वैश्विक कंपनियों के रूप में उभरना चाहिए। इसके लिए उन्हें विदेशी मुद्रा में पूंजी तक पहुंच की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी में स्थित बैंकों का कुल ऋण 85 अरब डॉलर को पार कर गया है, जबकि बकाया बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) करीब 45 अरब डॉलर है।

गिफ्ट सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में मौजूद एक्सचेंज पर ऋण प्रतिभूतियों के निर्गम में भी खासी तेजी आई है।

राजारमण ने कहा कि एक्सचेंज पर जारी कुल ऋण प्रतिभूतियों की बकाया राशि करीब 70 अरब डॉलर है, जिसमें लगभग 16 अरब डॉलर टिकाऊ ऋण है।

भारत में कंपनियों की कर्ज जुटाने की क्षमता के बारे में उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए ऋण जुटाने की काफी गुंजाइश है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय