तरक्की करने पर ही कर्मचारी किसी संगठन में बना रहता है: आनंद महिंद्रा

तरक्की करने पर ही कर्मचारी किसी संगठन में बना रहता है: आनंद महिंद्रा

तरक्की करने पर ही कर्मचारी किसी संगठन में बना रहता है:  आनंद महिंद्रा
Modified Date: March 19, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: March 19, 2026 10:30 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा है कि कर्मचारी किसी संगठन में तभी टिके रहते हैं जब उनका विकास होता है। यह सुविधाओं या वेतन के बारे में नहीं है, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वे खुद को बेहतर रूप में विकसित कर रहे हैं।

मैकिन्से के ‘लीडिंग एशिया’ साक्षात्कार में महिंद्रा ने कहा कि किसी संगठन के लिए यह भी बेहतर है कि वह आंतरिक रूप से नेतृत्व विकसित कर सके और एक ऐसी प्रणाली बनाए जिसमें प्रभावी हस्तक्षेप और प्रशिक्षण शामिल हो।

महिंद्रा को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखने वाला माना जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए जब उनसे प्रतिभा रणनीति के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि यदि आप आंतरिक रूप से नेतृत्व विकसित कर सकते हैं, तो आप बेहतर स्थिति में हैं। इसलिए, आपको एक ऐसी प्रणाली बनाने की आवश्यकता है जिसमें प्रभावी हस्तक्षेप और प्रशिक्षण शामिल हो।’’

उन्होंने कहा कि शुरुआत में, इससे प्रतिभाशाली लोगों को तेजी से आगे बढ़ाने का एक मजबूत मार्ग प्रशस्त हुआ और इस प्रक्रिया को महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह के सीईओ और प्रबंध निदेशक अनीश शाह ने और भी बेहतर बनाया है।

महिंद्रा ने कहा, ‘‘हमारे कुछ बेहतरीन नेतृत्व ने शुरुआत में ऊंचे पदों पर काम नहीं किया। लोग तभी टिके रहते हैं जब उनका विकास होता है। यह सुविधाओं या वेतन के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है कि क्या वे यहां खुद को और बेहतर बना पा रहे हैं या नहीं।’’

यह पूछे जाने पर कि नेतृत्व बनाते समय क्या महत्वपूर्ण है और वे इस प्रक्रिया में किस हद तक शामिल होते हैं, महिंद्रा ने कहा, ‘‘जब आप हमारी तरह तेजी से वृद्धि कर रहे होते हैं, तो आपको प्रतिभा के लिए आंतरिक रूप से ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से भी देखना पड़ता है। नियुक्ति प्रक्रिया का मेरा सबसे पसंदीदा हिस्सा शीर्ष पद के लिए विचार किए जा रहे किसी भी व्यक्ति के साथ 90 मिनट की अनौपचारिक बातचीत रही है।’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस बातचीत में उनका परीक्षण नहीं कर रहा था। मैं उनकी जिज्ञासा देख रहा था। जब कोई व्यक्ति अपने सीखे हुए ज्ञान के बारे में बात करते हुए चमक उठता था, तो मुझे पता चल जाता था कि वह यहीं का है।’’

एक सवाल के जवाब में महिंद्रा ने कहा, ‘‘विरासत संस्थागत होनी चाहिए… मूल्य न कि व्यक्ति।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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