नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसने केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालयों और राज्यों के अंतर्गत 852 परियोजनाओं की तीन-वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पाइपलाइन तैयार की है जिन पर कुल 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा को लागू करने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होने वाली तीन वर्षीय पीपीपी पाइपलाइन योजना बनाई है।
वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, यह पाइपलाइन संभावित पीपीपी परियोजनाओं की प्रारंभिक जानकारी प्रदान करती है, जिससे निवेशकों, विकास करने वाली कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को सोच-विचार कर निवेश निर्णय लेने में मदद मिलती है।
मंत्रालय ने विवरण साझा करते हुए कहा कि 13.15 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली 232 पीपीपी परियोजनाएं केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालयों द्वारा शुरू की जाएंगी, जबकि 3.84 लाख करोड़ रुपये की 620 परियोजनाएं 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा क्रियान्वित की जाएंगी।
केंद्र सरकार के हिस्से में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिकतम 108 परियोजनाएं हैं। इनका कुल बजट 8.76 लाख करोड़ रुपये है। इसके बाद बिजली मंत्रालय की 46 परियोजनाएं हैं, जिनका बजट 3.4 लाख करोड़ रुपये है। रेल मंत्रालय की 13 परियोजनाएं हैं, जिनका बजट 30,904 करोड़ रुपये है।
अन्य विभागों में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग 29 पीपीपी परियोजनाएं शुरू करेगा, जिन पर 12,254 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 8,743 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय वाली परियोजना शुरू करेगा।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग दो परियोजनाएं शुरू करेगा, जिनका बजट 6,646 करोड़ रुपये है। नागर विमानन मंत्रालय 11 परियोजनाएं शुरू करेगा, जिन पर 2,262 करोड़ रुपये का खर्च होंगे।
वहीं राज्यों के मामले में सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश का है, जहां 270 पीपीपी परियोजनाएं इस पाइपलाइन का हिस्सा हैं और इन पर 1.16 लाख करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। उसके बाद तमिलनाडु का स्थान आता है, जहां 70 परियोजनाओं पर 87,640 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।
भाषा रमण प्रेम
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