सरकार ने भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों के लिए एफडीआई नियम सरल किये

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सरकार ने भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों के लिए एफडीआई नियम सरल किये

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 08:34 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 08:34 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) सरकार ने मंगलवार को भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में ढील दी। अब इन देशों की 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां बिना अनिवार्य अनुमति के भारत में निवेश कर सकती हैं।

पहले, इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य अनुमति लेनी पड़ती थी।

हालांकि, इन निवेश पर क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाएं और प्रवेश मार्ग समेत एफडीआई नियमों की अन्य शर्तें लागू रहेंगी।

साथ ही, इन निवेश से संबंधित जानकारी/विवरण डीपीआईआईटी (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) को पहले से देना अनिवार्य होगा।

सरकार ने इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

प्रेस नोट में किए गए संशोधन में मनी लांड्रिंग निरोधक नियम, 2003 के तहत निवेश समुदाय द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले ‘लाभकारी स्वामित्व’ की परिभाषा और निर्धारण के लिए मानदंड प्रदान किए गए हैं।

लाभकारी स्वामित्व परीक्षण निवेशक इकाई के स्तर पर लागू किया जाएगा।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘ भूमि सीमा से लगे देशों (एलबीसी) के गैर-नियंत्रणकारी निवेशकों को, जिनके पास 10 प्रतिशत तक लाभकारी स्वामित्व है, क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाओं, प्रवेश मार्गों और संबंधित शर्तों के साथ स्वचालित मार्ग के तहत निवेश की अनुमति होगी।’’

सरकार ने विशिष्ट क्षेत्रों में भूमि सीमा से लगे देशों से निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का भी निर्णय लिया है।

इसके तहत, पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर या कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति द्वारा जोड़े गए किसी अन्य क्षेत्र/गतिविधि में विनिर्माण के निर्दिष्ट क्षेत्रों/गतिविधियों में भूमि सीमा से लगे देशों के निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर कदम उठाये जाएंगे और निर्णय लिए जाएंगे।

इन मामलों में, निवेशित इकाई की अधिकांश शेयरधारिता और नियंत्रण हमेशा भारतीय निवासी नागरिक और/या भारतीय निवासी नागरिक या नागरिकों के स्वामित्व और नियंत्रण वाली भारतीय निवासी इकाई या इकाइयों के पास रहेगा।

सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के जबरिया अधिग्रहणों को रोकने के लिए 17 अप्रैल, 2020 को प्रेस नोट-3 (2020) के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन किया था।

इसके बाद, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी देश की इकाई या जहां भारत में निवेश का लाभकारी स्वामी ऐसे किसी देश में स्थित है या उस देश का नागरिक है, वह केवल सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही निवेश कर सकती है।

इसके अतिरिक्त, भारत में किसी इकाई में मौजूदा या भविष्य के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के स्वामित्व का कोई भी हस्तांतरण जिसके परिणामस्वरूप लाभकारी स्वामित्व इन क्षेत्राधिकारों के अंतर्गत आता है, उसके लिए भी सरकार की स्वीकृति आवश्यक है।

इस नियम को निजी इक्विटी/ उद्यम पूंजी कोष जैसे वैश्विक कोष समेत सभी तरह के निवेशकों से निवेश प्रवाह को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाला माना गया था।

यह उम्मीद की जा रही है कि नए दिशानिर्देश भारत में व्यापार करने में स्पष्टता और सुगमता प्रदान करेंगे और निवेश को बढ़ावा देंगे, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में वृद्धि, नई प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, घरेलू मूल्यवर्धन, घरेलू कंपनियों के विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकरण में योगदान मिलेगा।

इससे भारत को निवेश और विनिर्माण के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाने और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं।

भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आये कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वह 23वें स्थान पर है।

जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गयी थी।

इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हालांकि, भारत को चीन से बहुत कम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है, फिर भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है।

चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है।

भारत का चीन को निर्यात 2024-25 में 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 16.66 अरब डॉलर था। हालांकि, आयात 2024-25 में 11.52 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 101.73 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा 2023-24 के 85 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर हो गया।

भारत का चीन को निर्यात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान 38.37 प्रतिशत बढ़कर 15.88 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.82 प्रतिशत बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 92.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

भाषा रमण अजय

अजय