असम में यूरिया संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं सरकारी उपक्रम : गौड़ा

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असम में यूरिया संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं सरकारी उपक्रम : गौड़ा

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  • Publish Date - January 21, 2021 / 04:06 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:08 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से असम में नामरूप में यूरिया संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा ताकि घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सके।

गौड़ा ने इस बनने वाले संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रामेश्वर तेली, असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, असम के उद्योग और वाणिज्य मंत्री चंद्र मोहन पटोवरी, केंद्रीय उर्वरक सचिव आर के चतुर्वेदी और उर्वरक विभाग के अतिरिक्त सचिव धर्म पाल शामिल हुए।

ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुशील चंद्र मिश्रा, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के सीएमडी एस मुदगेरिकर, ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सीएमडी असीम कुमार घोष और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के निदेशक निर्लेप सिंह राय भी मौजूद थे।

गौड़ा ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास लाना वर्तमान सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के प्रधान मंत्री (नरेंद्र मोदी) के दृष्टिकोण के अनुरूप, नामरूप में एक नई अत्याधुनिक यूरिया इकाई की स्थापना की प्रक्रिया को तेज करना अनिवार्य है।’’

गौड़ा ने कहा कि यह यूरिया इकाई उर्वरकों के लिए स्थानीय किसानों की मांगों को और निर्यात बाजार की मांग को भी पूरा करेगी। उन्होंने ‘‘अंशधारक सार्वजनिक इकाइयों के सीएमडी (अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक) लोगों को इस परियोजना के संदर्भमें अपनी आंतरिक प्रक्रिया को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए कहा।’’

असम के वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नामरूप परियोजना को हर तरह का समर्थन देने के लिए तैयार है, जिसमें वित्तीय सहायता भी संभव है।

तेली ने कहा कि नामवर-चतुर्थ इकाई स्थानीय विकास सुनिश्चित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसलिए परियोजना को तेज करने की आवश्यकता है।

अंशधारक पीएसयू के सीएमडी, नामरूप परियोजना पर अपनी आंतरिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सहमत हुए हैं।

भाषा राजेश राजेश मनोहर

मनोहर