जीएसटी नेटवर्क ने ई-वे बिल में प्रस्तावित बदलाव टाले
जीएसटी नेटवर्क ने ई-वे बिल में प्रस्तावित बदलाव टाले
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) माल एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने ई-वे बिल प्रणाली में प्रस्तावित दो बदलाव के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। उद्योग जगत से मिले सुझावों और आपत्तियों के बाद यह कदम उठाया गया है।
इन बदलावों को एक अगस्त, 2026 से लागू किया जाना था। इनमें पहला बदलाव ‘बिल-टू–शिप-टू’ यानी बिल किसके नाम पर बनेगा माल किसे या किस स्थान पर भेजा जाएगा लेनदेन में माल प्राप्त करने वाले का जीएसटीआईएन (शिप टू जीएसटीआईएन) दर्ज करना अनिवार्य करना था। इसका मकसद वस्तुओं के वास्तविक प्राप्तकर्ता की पहचान बेहतर ढंग से करने और माल की आवाजाही का पता लगाने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
दूसरा बदलाव ‘स्वैच्छिक समापन’ सुविधा शुरू करना था। इसके तहत करदाता उन परिस्थितियों में सक्रिय ई-वे बिल बंद कर सकते थे, जब अंततः माल की ढुलाई नहीं हो पाती। इन बदलावों के साथ ईआरपी (एंटरप्राइज रिर्सोस प्लानिंग) और ई-इनवॉयस एकीकरण के लिए ‘एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस’ (एपीआई) में भी संशोधन प्रस्तावित थे।
जीएसटीएन ने कहा कि नौ जून और 17 जून को जारी उसके परामर्श अगली सूचना तक स्थगित कर दिए गए हैं। परामर्श में इन बदलावों को एक अगस्त, 2026 से लागू करने का प्रस्ताव था।
ईवाई इंडिया के कर भागीदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि परीक्षण के दौरान कई कंपनियों ने पाया कि विशेषकर ‘ऑटो कंपोनेंट’, ईपीसी और ई-कॉमर्स जैसे जटिल आपूर्ति श्रृंखला वाले क्षेत्रों में प्रस्तावित ‘शिप-टू जीएसटीआईएन’ अनिवार्यता और ई-वे बिल की स्वैच्छिक समापन सुविधा को मौजूदा ई-इनवॉयसिंग और आईआरएन-आधारित ई-वे बिल प्रणाली के साथ लागू करना कठिन है।
उन्होंने कहा, “जीएसटीएन द्वारा केवल समयसीमा बढ़ाने के बजाय परामर्श और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) वापस लेना इस बात का संकेत है कि सरकार उद्योग जगत की प्रतिक्रियाओं और व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इन बदलावों के स्वरूप पर पुनर्विचार कर रही है।”
अग्रवाल ने कहा कि कंपनियां अब तक किए गए परीक्षण कार्य को सुरक्षित रखें, क्योंकि माल की आवाजाही की निगरानी को बेहतर बनाने का उद्देश्य संशोधित स्वरूप में आगे भी जारी रह सकता है।
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने कहा कि हालांकि जीएसटीएन ने स्थगन का कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा सकता है कि यह फैसला विभिन्न पक्षों को और तैयारी का समय देने के लिए लिया गया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल इन बदलावों को रोकने से कारोबार में समस्या नहीं आएगी और संशोधित कार्यान्वयन योजना घोषित होने तक मौजूदा ई-वे बिल व्यवस्था जारी रहेगी।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का माल ले जाने वाले व्यक्ति के लिए ई-वे बिल साथ रखना अनिवार्य है। माल की ढुलाई शुरू होने से पहले जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति या परिवहनकर्ता को जीएसटी पोर्टल पर यह दस्तावेज तैयार करना होता है।
एक जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने के साथ राज्यों की सीमाओं पर मौजूद जांच चौकियां समाप्त कर दी गई थीं। इसके बाद ई-वे बिल प्रणाली डिजिटल विकल्प के रूप में सामने आई। इसने माल की ऑनलाइन निगरानी को संभव बनाया और राज्य सीमाओं पर भौतिक बाधाएं दोबारा लगाए बिना कर प्रशासन के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद की।
भाषा रमण अजय
अजय

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