बेंगलुरु, 28 सितंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय कॉफी संगठन (आईसीओ) कॉफी क्षेत्र में विशेषकर इसकी खेती में सामाजिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें कोई बाल श्रमबल शामिल न हो। आईसीओ की कार्यकारी निदेशक वानुसिया नोग्यूरा ने यह जानकारी दी है।
आईसीओ कॉफ़ी के लिए मुख्य अंतर-सरकारी संगठन है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विश्व कॉफ़ी क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए निर्यात और आयात करने वाली सरकारों को एक साथ लाता है।
इसकी सदस्य सरकारें विश्व कॉफी उत्पादन का 98 प्रतिशत और उपभोग का 67 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं।
यहां विश्व कॉफी सम्मेलन के मौके पर एक साक्षात्कार में नोग्यूरा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अगर हम सामाजिक स्थिरता के बारे में बात करते हैं, तो इनमें से कई देशों में हमारे पास बहुत ही प्रतिबंधित कानून हैं। मुझे यकीन नहीं है कि हम अभी सामाजिक हिस्से के बारे में क्या मानक रख रहे हैं, लेकिन भविष्य में हमारा ध्यान इसी पर है।’’
उनके अनुसार, कुछ देश ऐसे हैं जो बाल श्रम को लेकर बहुत सख्त हैं, लेकिन कुछ अन्य ऐसे भी हैं जहां कानून अधिक लचीले हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए बाल श्रम के संदर्भ में एक चर्चा है। इस बारे में चर्चा है कि कुछ लोग इसे पारिवारिक व्यवसाय कहते हैं… यह आपके परिवार का हिस्सा है, यह आपके बेटे हैं, आपकी बेटियां हैं, फिर यह एक पारिवारिक व्यवसाय है, तब इसे बाल श्रम नहीं माना जा सकता था लेकिन कई देशों में इस पर सवाल उठाए गए हैं।’’
हालांकि, नोग्यूरा ने बताया कि कभी-कभी कुछ देशों में बाल श्रम या बच्चे अपने माता-पिता को उनके पारिवारिक व्यवसाय में सहायता करते हैं, लेकिन आईसीओ को ‘‘यह देखना होगा कि यह कैसे करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘…हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि बच्चों की स्कूल तक पहुंच होगी, उन्हें देश में शिक्षा प्रणाली के अंदर रहना होगा। उन्हें घर तक पहुंच रखने की जरूरत है।’’
उनके देश ब्राज़ील में परिवार द्वारा संचालित व्यवसायों के लिए भी बाल श्रम पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
खेती, स्थिरता और अन्य मानकों के सर्वोत्तम व्यवहार के संदर्भ में कॉफी उत्पादक देशों की रेटिंग पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोस्टा रिका खेतों के प्रबंधन और व्यवसाय की लाभप्रदता में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
अगर आप उत्पादकता के बारे में बात करते हैं, तो हम ब्राजील और वियतनाम में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता के बारे में बात करेंगे। ये रोबस्टा और अरेबिका के लिए मानक हैं।’’
बेंगलुरु ने चार दिवसीय विश्व कॉफी सम्मेलन-2023 की मेजबानी की, जिसमें 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, व्यापारियों और उत्पादकों ने हिस्सा लिया।
भारतीय कॉफ़ी बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, कर्नाटक देश में कुल कॉफ़ी उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान देता है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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