नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च के कारण अनुमान से अधिक 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। हालांकि, इस अवधि के अंत में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति शृंखला में बाधाओं ने आर्थिक परिदृश्य पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। पिछले वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत रही थी जबकि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह आठ प्रतिशत थी।
वित्त वर्ष 2025-26 की समूची अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जो 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.9 प्रतिशत बढ़ा, जो यह दर्शाता है कि वृद्धि केवल मांग पर आधारित नहीं थी, बल्कि उत्पादन में मजबूती भी रही। विनिर्माण, निर्माण एवं सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
हालांकि, इस तिमाही के अंतिम महीने मार्च में ही पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष का असर नजर आया। लेकिन यह तनाव जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और आपूर्ति में पैदा हुए गतिरोध का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
इस परिदृश्य में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने इस पर कहा कि यदि वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 में भारत की वृद्धि दर फिर से सात प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। उन्होंने कहा कि नीतिगत उपायों और आपूर्ति सुनिश्चित करने से अर्थव्यवस्था दोबारा तेज वृद्धि के रास्ते पर लौट सकती है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने कहा कि स्थिर कीमतों पर जीडीपी का आकार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के पहले संशोधित अनुमान 299.89 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का आकार 2025-26 में 346.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 318.07 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 8.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
यह 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई शृंखला के तहत जारी जीडीपी आंकड़ों का दूसरा समूह है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आंकड़ों पर कहा कि सरकार वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक रफ्तार बनाए रखने के लिए सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
एनएसओ के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में द्वितीयक (विनिर्माण, निर्माण) और तृतीयक (सेवाएं) क्षेत्रों ने क्रमशः 8.8 प्रतिशत और 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को मजबूती दी। इन क्षेत्रों में व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, प्रसारण, भंडारण, वित्त, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाएं शामिल हैं।
वहीं, प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य) की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में 3.2 प्रतिशत रही। चौथी तिमाही में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 4.6 प्रतिशत थी।
व्यय के मोर्चे पर निजी उपभोग और सकल स्थिर पूंजी निर्माण दोनों में 7.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 में जीवीए 7.9 प्रतिशत बढ़कर 294.91 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि चौथी तिमाही में यह 7.9 प्रतिशत की दर से बढ़कर 80.18 लाख करोड़ रुपये रहा।
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प्रेम अजय
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