भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रत्न एवं आभूषण निर्यात में बढ़ावा मिलेगा

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रत्न एवं आभूषण निर्यात में बढ़ावा मिलेगा

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 05:34 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 05:34 PM IST

मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) रत्न और आभूषण उद्योग ने मंगलवार को ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अमेरिकी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किये जाने का स्वागत किया। उद्योग की दलील है कि इससे व्यापार बढ़ेगा, विश्वास फिर से बनेगा, और पूरे क्षेत्र को एक मजबूत बढ़ावा मिलेगा।

भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है जिसके तहत अमेरिका भारतीय सामान पर जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत के बाद मिली है।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष, किरिट भंसाली ने कहा, ‘‘शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने से अमेरिकी आयातकों के लिए लागत कम होगी, हीरे के आभूषण निर्माताओं को बहुत राहत मिलेगी, भारतीय हीरे के आभूषणों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, मांग फिर से बढ़ेगी और परिचालन स्थिर होगा।’’

उन्होंने कहा कि जीजेईपीसी को उम्मीद है कि भारत द्वारा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, देश से बिना तराशे हीरे और रंगीन रत्नों को अमेरिका में शून्य शुल्क आयात का लाभ मिलेगा, जो अमेरिकी जवाबी शुल्क सूची का हिस्सा है, जो हीरे के निर्यात के लिए बहुत जरूरी समर्थन प्रदान करेगा।

जीजेईपीसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में, जवाबी अमेरिकी शुल्क ने अमेरिका को होने वाले व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया क्योंकि पॉलिश किए गए हीरे और रंगीन रत्नों पर शुल्क अप्रैल में शून्य प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया, फिर अगस्त तक 50 प्रतिशत हो गया, जो इन कच्चे माल के लिए गैर-लाभप्रद था, जिससे कार्यशील पूंजी, नकदी की स्थति और मार्जिन प्रभावित हुआ।

आभूषणों पर शुल्क 5-7 प्रतिशत से बढ़कर 55-57 प्रतिशत हो गया।

घरेलू मोर्चे पर, ‘ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल’ (जीजेसी) के अध्यक्ष, राजेश रोकड़े ने कहा कि अमेरिकी शुल्क में कमी भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।

जीजेसी के उपाध्यक्ष, अविनाश गुप्ता ने कहा, ‘‘अमेरिकी शुल्क में कटौती एक बड़ी उपलब्धि है जिससे छोटे और मझोले उद्यमों को सीधा फायदा होगा, जो भारत के आभूषण उद्योग की रीढ़ हैं।’’

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि कपड़ा, परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे कई श्रम-प्रधान क्षेत्र 50 प्रतिशत शुल्क के कारण अमेरिका को सामान निर्यात करने में चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक, कॉलिन शाह ने कहा कि शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करना भारतीय रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है और इसका स्वागत है।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका, भारतीय रत्न और आभूषणों का एक प्रमुख उपभोक्ता बाजार रहा है, और शुल्क के असर से कारोबार प्रभावित हो रहा था। यह ‘आंशिक’ छूट भारतीय आभूषण निर्माताओं और निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी बाजार में खरीदारों में भी विश्वास बहाल करेगी।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय