बेंगलुरु, सात फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) स्वदेशी चिप डिजाइन, उनके उत्पादन, पारिस्थितिकी साझेदार को आकर्षित करने और प्रतिभा के विकास को प्राथमिकता देगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने पर काम जारी रखेगी और दो नैनोमीटर नोड आकार तक के छोटे चिप्स का उत्पादन करने का लक्ष्य रखेगी।
वैष्णव ने क्वालकॉम के एक कार्यक्रम में कहा, ”सेमीकॉन 2.0 में सबसे पहली प्राथमिकता डिजाइन कंपनियां होंगी। ऐसी डिजाइन कंपनियां और स्टार्टअप जो उत्पाद डिजाइन कर सकें, उसे बाजार में ला सकें और भारत से अगले ‘क्वालकॉम’ बन सकें। हमारा ध्यान स्टार्टअप की उस ऊर्जा को डीप-टेक में बदलने पर होगा।”
यह कार्यक्रम क्वालकॉम द्वारा भारत में विकसित अपनी 2-नैनोमीटर चिप की घोषणा के लिए आयोजित किया गया था।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ‘आईएमएम 2.0’ के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसका मुख्य जोर उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर है ताकि तकनीकी विकास को गति दी जा सके और भविष्य के लिए कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।
वैष्णव ने कहा कि सरकार उपकरण निर्माताओं, रसायन निर्माताओं, गैस निर्माताओं और चिप के उत्पादन में सुधार करने वालों को साथ जोड़ने पर ध्यान देगी।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने 10 वर्षों में 85,000 सेमीकंडक्टर प्रशिक्षित प्रतिभाएं तैयार करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन केवल चार वर्षों के भीतर ही 67,000 प्रशिक्षित इंजीनियर तैयार हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि अब 315 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को ईडीए टूल्स (चिप डिजाइन करने वाली प्रणाली) दिए गए हैं। छात्र अब खुद चिप डिजाइन कर रहे हैं और मोहाली की सेमीकंडक्टर लैब में उनका सत्यापन करा रहे हैं।
क्वालकॉम इंडिया के प्रमुख सावी सोइन ने कहा कि कंपनी के चिप्स में इस्तेमाल होने वाली वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा का एक बड़ा हिस्सा भारत में विकसित हो रहा है।
भाषा पाण्डेय
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