जेएलआर इंडिया को कार की पूरी कीमत 1.65 करोड़ रुपये उपभोक्ता को लौटाने का आदेश

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जेएलआर इंडिया को कार की पूरी कीमत 1.65 करोड़ रुपये उपभोक्ता को लौटाने का आदेश

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 08:06 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 08:06 PM IST

देहरादून, 29 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने लक्जरी कार विनिर्माता कंपनी जेएलआर इंडिया को उसकी पूरी कीमत 1.65 करोड़ रुपये ब्याज सहित ग्राहक को लौटाने का आदेश दिया है। कंपनी के एक प्रमुख एसयूवी में विनिर्माण दोष तथा अनधिकृत संरचनात्मक बदलाव पाए जाने के बाद यह निर्देश दिया गया है।

आयोग की अध्यक्ष कुमकुम रानी तथा सदस्य बी एस मनराल की पीठ ने सोमवार को सुनाए अपने फैसले में कहा है कि विनिर्माता ने विज्ञापन में दिए अपने प्रदर्शन मानकों को पूरा करने में विफल रहने वाले वाहन को बेचकर ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और ‘सेवा में कमी’ की है ।

आयोग में शिकायत हरिद्वार जिले के रूड़की स्थित मैसर्स ईप्रो ग्लोबल लिमिटेड ने दर्ज कराई थी जिससे अक्टूबर 2022 में अपने निदेशक जगदीप चौहान के लिए ‘डिफेंडर 110 एक्स’ खरीदी थी ।

शिकायतकर्ता के वकील वैभव जैन के मुताबिक, यह एसयूवी अपने मूल वादों पर खरी नहीं उतर पाई। प्रमुख शिकायतों में से एक वाहन की एक्सीलरेशन क्षमता यानी गति बढ़ाने में कार द्वारा लिए जाने वाले समय से संबंधित थी जो कंपनी द्वारा विज्ञापन में दिए गए दावे से कहीं कम थी ।

कंपनी ने विज्ञापन में कहा गया था कि ‘पी400’ मॉडल 6.1 सेकंड में 0-100 किमी/घंटा की गति तक पहुंच सकता है लेकिन शिकायतकर्ता ने सबूत पेश किया कि वाहन को उस गति को प्राप्त करने में लगातार 7.1 सेकंड से अधिक समय लगता था। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता इस गलत बयान से ‘धोखा’ खा गया जो उसके द्वारा 1.65 करोड़ रुपये के वाहन की खरीद का एक महत्वपूर्ण कारक था।

एडवोकेट जैन ने तर्क दिया कि वाहन में ‘फ्यूल फिलर फ्लैप- सेंट्रल लॉकिंग’ प्रणाली का अभाव था, जो एक आवश्यक सुरक्षा सुविधा है और मानक विशिष्टताओं की सूची में शामिल थी। उन्होंने जोर दिया कि इस लॉकिंग प्रणाली के न होने से सुरक्षा का गंभीर खतरा पैदा होता है, क्योंकि अनाधिकृत व्यक्ति आसानी से ईंधन टैंक तक पहुंच कर ईंधन चुरा सकते हैं या रेत या चीनी जैसे खतरनाक पदार्थ डाल सकते हैं जो दूरदराज के क्षेत्रों में ‘जानलेवा’ साबित हो सकता है ।

आयोग के आदेश में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि वाहन के चेसिस यानी भार वहन करने वाले मूलभूत ढांचे में ‘बड़े पैमाने पर मरम्मत’ की गई थी। लगातार आ रही कर्कश आवाज की समस्या को दूर करने के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर ने कार मालिक की सहमति के बिना चेसिस की कटिंग, वेल्डिंग और रिवेटिंग कर दी।

पीठ ने कहा कि कार में इस तरह के संरचनात्मक बदलाव से इसकी बुनियाद ही बदल जाती है और इसकी सुरक्षा और उपयोगिता प्रभावित होती है।

जेएलआर इंडिया ने वाहन के प्रदर्शन में कमी का बचाव करते हुए दावा किया कि विज्ञापन में दी गयी गति ‘नियंत्रित परीक्षण स्थितियों’ के तहत हासिल की गई थी और ईंधन लॉक की कमी का कारण ‘ऑटोमोबाइल चिप्स की वैश्विक कमी’ थी । हालांकि, आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि खरीद के समय खरीददार को इनके बारे में सूचित नहीं किया गया था।

पीठ ने जेएलआर के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि खरीददार के साथ उसका कोई सीधा अनुबंध नहीं था और कहा कि एक निर्माता अपने डीलरों के साथ समझौतों के जरिए अंतर्निहित दोषों के लिए दायित्व से बच नहीं सकता ।

आयोग ने जेएलआर इंडिया को शिकायत स्वीकार किए जाने की तारीख (27 मार्च, 2024) से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1,65,61,234 रुपये की पूरी खरीद कीमत वापस करने का निर्देश दिया है । इसके अलावा, निर्माता को मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 50,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है ।

हालांकि, आयोग ने डीलर—शिवा मोटोकॉर्प को दोषमुक्त करार दिया क्योंकि वाहन में पाए गए दोष निर्माण प्रक्रिया में अंतर्निहित थे। शिकायतकर्ता को 15 दिनों के भीतर वाहन विनिर्माता कंपनी को लौटाने का निर्देश दिया गया है।

भाषा

दीप्ति रवि कांत रमण

रमण