नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) को लेखापरीक्षा प्रक्रियाओं और मानकों को प्रभावित करने वाले आदेशों, निर्देशों, परिपत्रों और नीतिगत निर्णयों को सार्वजनिक करने की सलाह दी है।
यह टिप्पणी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दायर दूसरी अपील के निपटान के दौरान की गई। अपील में एनएफआरए द्वारा लेखापरीक्षकों या लेखापरीक्षा कंपनियों को मौखिक सुनवाई के दौरान कानूनी सलाहकारों के जरिये प्रतिनिधित्व की अनुमति देने से संबंधित दस्तावेजों की मांग की गई थी।
एनएफआरए की स्थापना सरकार ने 2018 में कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत की है। यह लेखापरीक्षकों को विनियमित करता है और कंपनियों द्वारा लेखांकन और लेखापरीक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी करता है। यह वित्तीय रिपोर्टिंग में विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए लेखापरीक्षा सेवाओं की गुणवत्ता की भी देखरेख करता है।
सूचना आयुक्त पी आर रमेश ने आदेश में कहा, ‘‘एनएफआरए वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता की रक्षा करता है, जिन पर निवेशक, कर्ज देने वाले और आम जनता भरोसा करते हैं।’’
आयोग ने प्राधिकरण को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उसके दायित्वों की भी याद दिलाई।
आदेश में कहा गया, ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 4 के प्रावधानों के तहत प्रतिवादी का यह कर्तव्य है कि वह धारा 4(1)(ख) और 4(1)(ग) में उल्लेखित जानकारी को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करे ताकि जनता को जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम का सहारा कम-से-कम लेना पड़े।’’
इसी के अनुरूप, सीआईसी ने प्राधिकरण को सलाह दी कि वह जनहित में सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा चार के प्रावधानों के अनुसार अपने विभाग द्वारा जारी विभिन्न परिपत्रों/नीतिगत निर्णयों/आदेशों से संबंधित जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए।
सुनवाई के दौरान, एनएफआरए ने कहा कि अपीलकर्ता द्वारा मांगा गया दस्तावेज कोई आदेश नहीं था, बल्कि व्यक्तिगत मामलों में लेखा परीक्षकों या लेखापरीक्षा फर्मों को कार्यवाही का सामना करने के लिए जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के साथ एक आंतरिक नोट था।
इस बात को स्वीकार करते हुए, आयोग ने माना कि केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) द्वारा उचित उत्तर प्रदान किया गया था।
भाषा रमण अजय
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