संसदीय समिति ने पुराने उर्वरक संयंत्रों को आधुनिक रूप देने की सिफारिश दोहराई

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संसदीय समिति ने पुराने उर्वरक संयंत्रों को आधुनिक रूप देने की सिफारिश दोहराई

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  • Publish Date - July 27, 2026 / 09:25 PM IST,
    Updated On - July 27, 2026 / 09:25 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) एक संसदीय समिति ने सरकार से पुराने उर्वरक संयंत्रों के कायाकल्प और आधुनिकीकरण के लिए योजना शुरू करने की अपनी सिफारिश को दोहराया है।

रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति ने सोमवार को ‘सार्वजनिक क्षेत्र के उर्वरक उपक्रमों के विनिवेश से जुड़े मामले- एक समीक्षा’ विषय पर पेश अपनी रिपोर्ट में यह अनुशंसा की। यह रिपोर्ट रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग से संबंधित है।

संसदीय समिति ने विभाग के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि उसकी व्यापक सिफारिश पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। समिति ने सभी सार्वजनिक उर्वरक उपक्रमों के 25 साल से अधिक पुराने 27 यूरिया संयंत्रों और 50 साल से अधिक पुराने सात संयंत्रों के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से ‘कायाकल्प और उन्नयन योजना’ शुरू करने का सुझाव दिया था।

समिति ने कहा कि विभाग के जवाब से यह स्पष्ट नहीं होता कि पूरे क्षेत्र में इस तरह के कायाकल्प कार्यक्रम के लिए आवश्यक कुल पूंजी का आकलन किया गया है या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि योजना के स्वरूप पर नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ कोई चर्चा शुरू की गई है।

समिति ने अपनी पिछली सिफारिश को दोहराते हुए विभाग से पुरानी होती जा रही यूरिया तथा पी एंड के (फॉस्फोरिक और पोटासिक) उर्वरक इकाइयों के मूल्यांकन की वर्तमान स्थिति बताने को कहा है। इसमें उनके आधुनिकीकरण की आवश्यकता, शेष आर्थिक आयु और संभावित पूंजी निवेश का आकलन शामिल है।

संसदीय समिति ने अपनी पिछली रिपोर्ट में देश के उर्वरक उत्पादन ढांचे, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में, पुरानी और तकनीकी रूप से जर्जर होती इकाइयों पर गंभीर चिंता जताई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में संचालित 33 यूरिया संयंत्रों में से 27 संयंत्र 25 साल से अधिक पुराने हैं, जबकि सात इकाइयां 50 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं। इससे अक्षमता, अधिक ऊर्जा खपत और परिचालन लागत बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है।

समिति ने सार्वजनिक क्षेत्र के उर्वरक उपक्रमों की भूमि का व्यापक राष्ट्रीय अंकेक्षण, गैर-मुख्य परिसंपत्तियों का स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन तथा विशेष उद्देश्य कोष, लीज मॉडल या सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से ठोस परिसंपत्ति मुद्रीकरण ढांचा तैयार करने की अपनी सिफारिश भी दोहराई है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम