महाराष्ट्र ने खनिज चोरी, राजस्व नुकसान को रोकने के लिए ‘महाखनिज 2.0’ पेश किया

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महाराष्ट्र ने खनिज चोरी, राजस्व नुकसान को रोकने के लिए 'महाखनिज 2.0' पेश किया

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 09:31 PM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 09:31 PM IST

मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को ‘महाखनिज 2.0’ डिजिटल प्रणाली पेश की। इसका मकसद राज्य में सूक्ष्म खनिजों के खनन, परिवहन, लाइसेंसिंग और निगरानी में पारदर्शिता और कुशलता लाना है।

एक सरकारी बयान के अनुसार, राजस्व विभाग द्वारा विकसित यह प्रणाली कागज-आधारित प्रक्रियाओं की जगह डिजिटल परमिट का इस्तेमाल करेगी। साथ ही, खनिजों के परिवहन और खनन गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए ‘ग्लोबल पोजिशनिंग प्रणाली’ (जीपीएस), कृत्रिम मेधा (एआई), स्वत: नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर), भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), जियोफेंसिंग, ड्रोन और लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (एलआईडीएआर) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

राज्य सरकार ने इस उन्नत प्रणाली के जरिये अगले पांच साल में सूक्ष्म खनिजों से 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है।

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मौजूदा ‘महाखनिज’ प्रणाली ने पिछले पांच वर्षों में राज्य के लिए लगभग 16,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है।

महाखनिज 2.0 के तहत, क्यूआर कोड और बारकोड का इस्तेमाल करके 100 प्रतिशत डिजिटल ट्रांसपोर्ट परमिट (जिन्हें डिजिटीपी कहा जाएगा) जारी किए जाएंगे, जिससे भौतिक परमिट की जरूरत खत्म हो जाएगी।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय