उपलब्धता घटने, मांग निकलने के बीच बीते सप्ताह अधिकांश तेल-तिलहनों में सुधार

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उपलब्धता घटने, मांग निकलने के बीच बीते सप्ताह अधिकांश तेल-तिलहनों में सुधार

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  • Publish Date - April 26, 2026 / 03:08 PM IST,
    Updated On - April 26, 2026 / 03:08 PM IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) मंडियों में उपलब्धता कम रहने और उपभोक्ताओं की मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल जैसे अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम लाभ के साथ बंद हुए। ऊंचे दाम पर मांग कमजोर रहने की वजह से मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट रही।

बाजार सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के पहले के हफ्ते में जिस सोयाबीन डीगम तेल का दाम 1,310-15 डॉलर प्रति टन था वह समीक्षाधीन सप्ताह में बढ़कर 1,345-50 डॉलर प्रति टन हो गया। इसकी वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम मजबूत हुए। इसके असर के अलावा मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत रहने से पाम-पामोलीन कीमतों में भी मजबूती आई।

उन्होंने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह से पहले मंडियों में सोयाबीन की आवक लगभग डेढ़ लाख बोरी की हो रही थी जो घटकर बीते सप्ताह 90-95 हजार बोरी रह गई। इसके अलावा सोयाबीन के तेल-रहित खल (डीओसी) की भी स्थानीय मांग बढ़ी है जो सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम सुधरने में मददगार साबित हुआ।

सूत्रों ने कहा कि देश की मंडियों में कपास की आवक जो पहले 40-42 हजार गांठ की हो रही थी वह घटकर 30-32 हजार गांठ रह गई। उत्तर भारत में यह आवक घटकर 400-500 गांठ की ही रह गई है। इस वजह से बिनौला तेल के दाम में भी सुधार आया।

उन्होंने कहा कि सरसों की पैदावार के बाद मंडियों में इस समय जो बिक्री की भरमार रहती थी, वह आवक इस बार कम है और किसान रोक-रोक कर माल ला रहे हैं। किसानों का मनोबल तोड़ने के लिए केवल सटोरिये अपनी तरफ से मनमाना आवक का अनुमान बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हैं। इस कमजोर आवक की वजह से सरसों तेल-तिलहन के दाम में भी सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि आयातित तेलों के मुकाबले सरसों तेल का दाम सस्ता है। सरसों के रिफाइंड भी बनाये जा रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार को सरसों का स्टॉक बनाने की ओर विशेष प्रयास करना चाहिये ताकि मुश्किल वक्त में यह फायदेमंद साबित हो।

उन्होंने कहा कि आयातित तेलों के मुकाबले सरसों तेल का थोक दाम 15-17 रुपये किलो सस्ता है। अब इस बात की ओर ध्यान दिया जाना बेहतर होगा कि इस सस्तेपन का लाभ उपभोक्ताओं को मिल भी रहा है अथवा नहीं।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 15 रुपये के सुधार के साथ 6,840-6,865 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 14,200 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 5-5 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,375-2,475 रुपये और 2,375-2,520 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 325-325 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 6,150-6,200 रुपये और 5,800-5,875 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 275 रुपये के सुधार के साथ 16,000 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 425 रुपये के सुधार के साथ 15,850 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 12,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

दूसरी ओर, मूंगफली तिलहन का दाम 150 रुपये की गिरावट के साथ 6,750-7,225 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 500 रुपये की गिरावट के साथ 16,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 80 रुपये की गिरावट के साथ 2,530-2,830 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 475 रुपये के सुधार के साथ 13,425 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 500 रुपये बढ़कर 15,350 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 300 रुपये की मजबूती के साथ 14,150 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

सुधार के आम रुख के अनुरूप, बिनौला तेल का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 14,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा राजेश पाण्डेय

पाण्डेय