मुंबई, 26 अप्रैल (भाषा) उद्योगपति पिरोजशा गोदरेज ने कहा कि मुंबई को मैंग्रोव (तटीय वनस्पति) के संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने उपनगरीय विखरोली में खाड़ी के पास परिवार के नियंत्रण वाले मैंग्रोव क्षेत्र को कभी भी विकसित न करने का संकल्प लिया।
यह टिप्पणी वर्सोवा में एक सी-लिंक के लिए 45,000 मैंग्रोव के पेड़ों को काटने के कदम के बीच आई है। गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप के नामित चेयरमैन ने कहा कि जब प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की बात आती है, तो हमें प्रतिस्पर्धी विमर्शों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
खाड़ी के किनारे मैंग्रोव के एक विशाल क्षेत्र ने नजदीक स्थित अपने कार्यालय में ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में गोदरेज ने कहा, ”मुझे लगता है कि शहर को उनके (मैंग्रोव) संरक्षण पर बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।”
मैंग्रोव को एक सदी से भी अधिक पुराने इस औद्योगिक घराने के लिए गौरव का विषय बताते हुए गोदरेज ने कहा कि उनके नियंत्रण वाले मैंग्रोव, लंदन के हाइड पार्क के आकार से पांच गुना अधिक बड़े हैं और उन्होंने उनकी रक्षा करने की शपथ ली।
पिरोजशा गोदरेज (45) अगस्त से परिवार के व्यवसाय के एक हिस्से का नेतृत्व करने वाले हैं, ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस क्षेत्र को कभी विकसित नहीं किया जाएगा।
गोदरेज, जो पिछले कुछ वर्षों से रियल्टी व्यवसाय की देखरेख कर रहे हैं, ने हालांकि सुझाव दिया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच की बहस में किसी एक पक्ष का चुनाव करना बहुत कठिन है।
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि समस्या दोनों पक्षों के साथ है। कभी-कभी विकास बहुत ही बेतरतीब, अराजक और पर्यावरण के लिए विनाशकारी तरीके से किया जाता है। लेकिन साथ ही कभी-कभी संरक्षण का मामला अनावश्यक रूप से विकास विरोधी तरीके से पेश किया जाता है।”
गोदरेज ने कहा कि विकास अनिवार्य है, अन्यथा एक शहर अपनी प्रासंगिकता खो देगा। उन्होंने ऊंची इमारतों, सार्वजनिक परिवहन और मोहल्लों में पार्क होने को सही दृष्टिकोण बताया।
गोदरेज ने कहा कि पर्यावरणविद् तब पूरी तरह गलत होते हैं जब वे इमारतों की ऊंचाई को सीमित करने के लिए दबाव डालते हैं, क्योंकि इससे बेतरतीब और अवैध विकास को बढ़ावा मिलता है।
भाषा पाण्डेय
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