(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच घरों में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
सीतारमण ने राज्यसभा में अनुदान संबंधी अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में खरीफ फसल के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और अगली रबी फसल के लिए पोषक तत्वों की खरीद को लेकर वैश्विक बोली प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर नकद सब्सिडी के बदले तेल विपणन कंपनियों को जारी किए गए 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बॉन्ड का सरकार निपटान कर रही है। इन बॉन्ड पर ब्याज दर सात से 8.4 प्रतिशत के बीच थी।
देश में एलपीजी की किल्लत के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरतों का लगभग 65 प्रतिशत आयात करता है…। पश्चिम एशिया संकट ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है…। एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। इससे, यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि हमें एलपीजी मिलेगी या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन संकट के समय में हम किस तरह आपूर्ति को सुचारू रूप से सुनिश्चित कर रहे हैं, इस बारे में पर्याप्त रिपोर्ट मौजूद हैं।’’
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता पर जोर देने तथा भारत की बुनियादी मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों से देश को मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि देश ने अपने बिजली क्षेत्र का व्यापक विकास किया है। यह कई तरह से जरूरतों को पूरा कर रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि 2014 से स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई है और अब देश में बिजली की कोई कमी नहीं है।
सीतारमण ने कहा, ‘‘एलपीजी क्षेत्र में भी हम क्षमता निर्माण कर रहे हैं और इस समय भी, एलपीजी में घरेलू क्षमता बढ़ाने का हमारा जो प्रयास है, उससे भी मदद मिल रही है।’’
सरकार ने आठ मार्च को तेल रिफाइनरियों और पेट्रोरसायन परिसरों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘परिणामस्वरूप, घरेलू स्तर पर भी हम एलपीजी आपूर्ति के लिए क्षमता बढ़ा रहे हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।’’
इस बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता का पूरा हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं को जाएगा।
उन्होंने कहा, “इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि परिवारों को परेशानी न हो, न केवल शिपिंग लाइन की निरंतर आवाजाही जारी है, बल्कि हमने घरेलू स्तर पर भी एलपीजी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए अन्य हाइड्रोकार्बन पदार्थों से एलपीजी उत्पादन की ओर रुख किया है।
मंत्री ने सदन में कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप, घरेलू आपूर्ति पर्याप्त रूप से व्यवस्थित होगी और आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।”
उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में रातोंरात 25 प्रतिशत की वृद्धि करने की क्षमता, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता और समग्र ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधन (कोयला आदि) की घटती हिस्सेदारी संयोगवश नहीं हुई है।
सीतरमण ने कहा, ‘‘सरकार के स्थिर नीतिगत दृष्टिकोण की ही वजह से हम किसी भी स्थिति में अचानक सुधार करने में सक्षम हुए हैं, जिससे अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ने पर हम उसका लाभ उठा सकते हैं। यह प्रधानमंत्री द्वारा 2014 में शुरू की गई ऊर्जा बदलाव रणनीति का परिणाम है।’’
उन्होंने सदन को सूचित किया कि गैर-जीवाश्म यानी स्वच्छ ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 271.97 गीगावाट है, जो कुल क्षमता का 52 प्रतिशत से अधिक है। वहीं जीवाश्म ईंधन की उत्पादन क्षमता 248.5 गीगावाट है।
देश में पहली बार, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता जीवाश्म ईंधन ऊर्जा उत्पादन से अधिक हो गई।
मंत्री ने यह भी कहा कि संप्रग सरकार के गलत उधारी कार्यक्रमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज इसका जिक्र इसलिए कर रही हूं क्योंकि इनमें से कई उधार अब हम चुका रहे हैं। मुद्दा यह है कि ये उधार उस समय बजट में शामिल नहीं किए गए थे।’’
सीतारमण ने कहा कि यदि इन देनदारियों को बजट में पारदर्शी रूप से शामिल किया जाता, तो राजकोषीय घाटे के आंकड़े बिल्कुल अलग होते।
इससे, यदि बजट लेखांकन पारदर्शी होता, तो वृद्धि अनुमान और वास्तविक वृद्धि के आंकड़े उतने मजबूत नहीं दिखते जितने दिखाए गए थे।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘…दरअसल, इस महीने हम संप्रग सरकार द्वारा जारी किए गए सभी तेल बॉन्ड का निपटान कर देंगे।’’
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि आज की अर्थव्यवस्था अतीत के तथाकथित ‘सुनहरे’ दौर की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और मजबूत है, जो बजट से बाहर लेखांकन गतिविधियों द्वारा समर्थित था।
राज्यसभा ने अनुदान पर चर्चा तथा वित्त मंत्री के जवाब के बाद विनियोग विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर लोकसभा को लौटा दिया।
इसके साथ संसद ने अनुदान के लिए अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच को मंजूरी दे दी है। इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त 2.01 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति मिल गई है।
सरकार ने पूरक मांगों के दूसरे बैच के जरिये चालू वित्त वर्ष में कुल 2.81 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय के लिए संसद से मंजूरी मांगी थी। पूरक मांगों में चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्तियों के साथ, शुद्ध अतिरिक्त खर्च 2.01 लाख करोड़ रुपये होगा।
लोकसभा ने इसे 13 मार्च को मंजूरी प्रदान की थी।
भाषा रमण प्रेम
प्रेम