नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने केरलम की सरकारी शराब खरीद एजेंसी के खिलाफ कथित दबदबे के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायत बंद करने के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायाधिकरण ने कहा कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईएबीसी) और एसोसिएशन ऑफ डिस्टिलर्स, ब्रुअर्स एंड विंटर्स ऑफ इंडिया (एडीबीवीआई) की अपील खारिज कर दी। इन संगठनों ने आरोप लगाया था कि केरल स्टेट बेवरेजेज (विनिर्माण एवं विपणन) कॉरपोरेशन (केएसबीसी) ने राज्य में अपनी दबदबे की स्थिति का दुरुपयोग किया है।
प्रतिस्पर्धा आयोग ने 21 अक्टूबर, 2021 को केएसबीसी लिमिटेड और त्रावणकोर शुगर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (टीएससीएल) के खिलाफ जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था। इसी आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि केरल में शराब की थोक खरीद और वितरण पर एकाधिकार रखने वाली केएसबीसी ने खरीद मूल्य एकतरफा तय किए, मनमानी निविदा शर्तें लागू कीं, भुगतान में देरी की तथा सरकारी कंपनियों के ब्रांड को निजी कंपनियों पर तरजीह दी।
हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि अपीलकर्ता प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों के “ठोस साक्ष्य” पेश करने में विफल रहे। पीठ ने कहा कि सीसीआई ने उपलब्ध सीमित दस्तावेजों और सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है।
पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने यह भी नहीं दिखाया कि कथित आचरण से उन्हें क्या वास्तविक नुकसान या हानि हुई, जबकि यह प्रथम दृष्टया स्तर पर भी आवश्यक तत्व है।
भाषा अजय अजय
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