नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने मंगलवार को नियमों में पारदर्शिता को लेकर अधिनियम का प्रस्ताव रखा, ताकि सभी नियम, विनियमन और नागरिकों के लिए आवश्यक शर्तें एक अलग केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो सकें।
इस कदम से कारोबार और जीवन स्तर में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था की एक बड़ी खामी यह है कि अनेक नियम और विनियमन होने के बावजूद किसी को यह नहीं पता होता कि कौन सा संस्करण नवीनतम है।
सान्याल ने उद्योग मंडल एसोचैम के भारत व्यापार सुधार सम्मेलन में कहा कि प्रस्तावित अधिनियम में यह प्रावधान होगा कि नागरिकों और कंपनियों द्वारा पालन किए जाने वाले सभी नियम और विनियमन एक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘पारदर्शिता नियम अधिनियम लागू करने की आवश्यकता है। इसमें तीन तत्व होने चाहिए जिनके लिए मैं काफी समय से प्रयासरत हूं…। लेकिन इसके लिए जन दबाव की आवश्यकता है। कृपया इसमें मेरा समर्थन करें क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण सुधार है जिसे हमें करने की जरूरत है।’’
इसके तहत, उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सभी कानून, नियम, विनियमन, प्रपत्र और अन्य नागरिक-संबंधी आवश्यकताएं अलग से बनाये गये एक केंद्रीकृत पोर्टल और संबंधित विभाग/एजेंसी के पोर्टल पर आसानी से उपलब्ध हों।
एक बार किसी सरकारी एजेंसी को पारदर्शिता नियम अधिनियम (टीओआरए) के अनुरूप घोषित कर दिया जाए, तो अधिकारियों को तब तक नियम लागू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि उन्हें एजेंसी की वेबसाइट और एकीकृत पोर्टल पर स्पष्ट रूप से प्रकाशित न कर दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों और मानदंडों को समग्र रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसे अंतहीन परिपत्रों की श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है।
सान्याल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एक ‘मास्टर’ परिपत्र के माध्यम से यह आसानी से किया जा सकता है। प्रस्तावित अधिनियम में यह भी अनिवार्य होना चाहिए कि पोर्टल और वेबसाइट पर किए गए प्रत्येक बदलाव का स्पष्ट समय अंकित हो।
इससे नागरिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि कोई नियम कब से लागू हुआ या कब हटाया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘…किसी भी कानून की जानकारी न होना कोई सुरक्षा नहीं है…। लेकिन हर नागरिक या व्यवसाय को यह जानने का उचित अवसर मिलना चाहिए कि कानून क्या है।’’
सान्याल ने यह भी कहा कि हालांकि भारत सेवाओं का निर्यात करने वाला देश है, लेकिन यहां कोई भारतीय ‘बिग फोर’ परामर्श कंपनियां नहीं है, जबकि विश्व स्तर पर इस व्यवसाय में भारतीयों का दबदबा है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्यों…? हमारे अपने पेशेवर निकायों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं…। हम खुद विज्ञापन और ब्रांड निर्माण पर प्रतिबंध लगाते हैं…। हम अपनी परामर्श कंपनियों को ब्रांडिंग की अनुमति नहीं देते हैं।’’
भाषा रमण अजय
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