नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने स्पष्ट किया है कि जब कोई पंजीकृत करदाता अपने व्यवसाय को मूल स्थान वाले कर क्षेत्राधिकार से दूसरी जगह स्थानांतरित करता है, तो नया क्षेत्राधिकार उस करदाता से जुड़े सभी लंबित मामलों की जिम्मेदारी संभालेगा और उनका निपटान करेगा।
सीबीआईसी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) कानून के तहत जांच, ऑडिट, कारण बताओ नोटिस या न्यायिक निर्णय जैसी कोई भी कार्रवाई, जो स्थानांतरण से पहले के क्षेत्राधिकार प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई थी, वह करदाता के दूसरे क्षेत्र में जाने के बाद भी पूरी तरह वैध रहेगी।
सीबीआईसी ने एक परिपत्र में कहा, ‘‘स्थानांरण वाले क्षेत्र में प्राधिकारण ऐसी पूर्व में की गई वैध कार्रवाई को स्वीकार करेगा, उसे प्रभावी बनाएगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा, मानो उसने स्वयं उसे शुरू किया हो।’’
बोर्ड ने बताया कि क्षेत्रीय कार्यालयों से ऐसे मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिनमें करदाता के मूल कारोबार स्थान बदलने के बाद क्षेत्राधिकार में बदलाव हो जाता है।
इसमें यह भी कहा गया है कि यदि स्थानांतरण के बाद पूर्व क्षेत्राधिकार अधिकारी के संज्ञान में कोई नया मुद्दा आता है, तो उसे आगे की कार्रवाई के लिए नए क्षेत्राधिकार अधिकारी को सूचित करना होगा।
सीबीआईसी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कार्रवाई या कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान करदाता दूसरे क्षेत्राधिकार में स्थानांतरित हो जाता है, तो नया क्षेत्राधिकार अधिकारी उस मामले को वहीं से आगे बढ़ाकर पूरा करेगा जहां से वह रुका था।
नए क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू करने और उसे पूरा करने का भी अधिकार होगा।
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने कहा कि यह स्पष्टीकरण जीएसटी के तहत प्रक्रिया से जुड़ी एक अहम कमी को दूर करता है। इससे करदाताओं के एक जगह से दूसरी जगह जाने से जुड़े मामलों को संभालने में ज्यादा एकरूपता आने की उम्मीद है।
मोहन ने कहा, ‘‘मामला ट्रांसफर करने वाले और उसे लेने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारियों को साफ तौर पर तय करके, सीबीआईसी ने उस अस्पष्टता को दूर कर दिया है जिसकी वजह से अक्सर अधिकार क्षेत्र को लेकर आपत्तियां उठती थीं और मामलों के निपटान में देरी होती थी।’’
भाषा योगेश रमण
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