नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावों से जुड़ी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की दो-सदस्यीय पीठ सोमवार को भी बहुमत की राय पर नहीं पहुंच सकी। इस वजह से मामले में अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हो पाया है।
न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी की पीठ ने बहुमत न बन पाने की स्थिति में मामले को एनसीएलटी अध्यक्ष के पास भेज दिया। अब अध्यक्ष बहुमत की राय बनाने के लिए किसी तीसरे सदस्य को नियुक्त कर सकते हैं या खुद ही आदेश जारी कर सकते हैं।
चार साल से चल रहे मामले को मूल पीठ के दोनों सदस्यों के बीच मतभेद के बाद इसे तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के पास भेजा गया था। शर्मा ने 25 अगस्त को 144 पन्नों के अपने आदेश में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के ऋणदाताओं के दावों के मुकाबले चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान योजना के तहत 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी थी। इस तरह कर्जदाताओं को बकाया राशि का करीब 99.97 प्रतिशत नुकसान (हेयरकट) उठाना था।
नियम के तहत तीसरे सदस्य की राय को मूल पीठ के पास औपचारिक आदेश के लिए भेजा गया था। हालांकि, सोमवार को मूल पीठ ने कहा कि तीसरे सदस्य ने दोनों सदस्यों से अलग स्वतंत्र राय दी है और इस कारण मामले में कोई बहुमत की राय नहीं बन सकी।
पीठ ने कहा कि तकनीकी सदस्य ने समाधान योजना को खारिज किया था, जबकि न्यायिक सदस्य ने इसकी मंजूरी को केवल उन ऋणदाताओं तक सीमित रखा था जिन्होंने इसे स्वीकार किया था और असहमत ऋणदाताओं को चंद्रा से अपनी रकम वसूलने की स्वतंत्रता दी थी।
पीठ ने कहा कि तीसरे सदस्य ने सभी ऋणदाताओं पर दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 115(1) समान रूप से लागू करते हुए योजना को मंजूरी दी और सभी ऋणदाताओं के दावों को समाप्त कर दिया।
मामले में मतभेद आईबीसी की धारा 79(2)(जी) की व्याख्या और इसे धारा 115(1) के साथ पढ़े जाने को लेकर है। धारा 115(1) ऋणदाताओं द्वारा पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया से संबंधित है।
चंद्रा की समाधान योजना में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले ऋणदाताओं को 6.25 करोड़ रुपये लौटाने और प्रक्रियागत खर्च के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है।
तीसरे सदस्य शर्मा ने योजना को मंजूरी देते हुए कहा था कि चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत प्रस्तावित राशि से भी कम है और योजना खारिज होने की स्थिति में ऋणदाताओं के लिए अधिक वसूली की संभावना नहीं रह जाएगी।
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प्रेम अजय
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