नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक अधिकार-प्राप्त समिति ने सुपरटेक रियल्टर्स की नोएडा स्थित ‘सुपरनोवा’ परियोजना में किसी भी संपत्ति लेनदेन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी है।
समिति ने एक सार्वजनिक नोटिस में कहा है कि परियोजना की किसी भी इकाई से जुड़े ‘बिक्री, हस्तांतरण, आवंटन या स्वामित्व हस्तांतरण’ के लिए उसकी पूर्व लिखित मंजूरी आवश्यक होगी। बिना अनुमति किए गए किसी भी लेनदेन को शुरू से ही शून्य और अमान्य माना जाएगा।
नोटिस के मुताबिक, 16 दिसंबर 2025 से निदेशक मंडल के किसी भी पूर्व निर्णय, जिसके तहत इकाइयों की बिक्री या हस्तांतरण की अनुमति दी गई थी, अब मान्य नहीं होंगे।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अनधिकृत लेनदेन में शामिल व्यक्ति स्वयं जोखिम उठाएंगे और उन्हें परियोजना, डेवलपर या किसी प्राधिकरण के खिलाफ कोई अधिकार या दावा प्राप्त नहीं होगा।
यह परियोजना नोएडा के सेक्टर-94 में ‘सुपरनोवा’ नाम से विकसित की जा रही है। इसमें आवासीय, वाणिज्यिक, कार्यालय, स्टूडियो रूम, सर्विस अपार्टमेंट और शॉपिंग सेंटर शामिल हैं।
वित्तीय संकट और निर्माण में देरी के कारण यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई है, जिससे करीब 2,800 खरीदार प्रभावित हैं। इस स्थिति में शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2025 में एक अधिकार-प्राप्त समिति का गठन किया था, जिसे परियोजना के समाधान और पुनरुद्धार की निगरानी सौंपी गई है।
इसी क्रम में समिति ने परियोजना के पुनरुद्धार को तेज करने के लिए प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) को लेन-देन सलाहकार नियुक्त किया है, जो नए डेवलपर की पहचान और चयन की प्रक्रिया संभालेगा।
समिति की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम एम कुमार कर रहे हैं।
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