भारत यात्रा से पहले अमेरिकी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा मंत्री से मुलाकात की

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भारत यात्रा से पहले अमेरिकी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा मंत्री से मुलाकात की

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 09:30 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 09:30 PM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 15 मई (भाषा) अमेरिकी परमाणु उद्योग के शीर्ष पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने मुलाकात कर परमाणु क्षेत्र को लेकर चर्चा की।

यह प्रतिनिधिमंडल भारत द्वारा पूर्व में कड़ाई से नियंत्रित परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने के बाद सहयोग का पता लगाने के लिए अगले सप्ताह नयी दिल्ली की यात्रा पर जाने वाला है।

अमेरिका का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ बातचीत करेगा, जो पिछले साल दिसंबर में ‘‘भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) कानून’’ के लागू होने के बाद से असैन्य परमाणु क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का पता लगाने का इच्छुक है।

शांति अधिनियम ने 1964 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 के परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व (सीएनएलडी) अधिनियम का स्थान लिया है। सीएनएलडी अधिनियम में परमाणु आपूर्तिकर्ताओं पर सख्त दायित्व के प्रावधान थे, जिन्हें वैश्विक कंपनियों ने भारतीय बाजार में प्रवेश करने में एक बाधा के रूप में पाया।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) और परमाणु ऊर्जा संस्थान की एक पहल के तहत अमेरिकी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल भारत की यात्रा कर रहा है।

यूएसआईएसपीएफ ने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यूएसआईएसएफ और परमाणु ऊर्जा संस्थान (एनईआई) को भारत यात्रा से पहले अमेरिकी ऊर्जा मंत्री राइट का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अमेरिकी कार्यकारी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ इस विषय में जानकारी साझा की।’’

अमेरिकी उद्योग प्रतिनिधिमंडल से नागरिक परमाणु ऊर्जा को लेकर भारतीय निजी क्षेत्र के साथ संयुक्त परियोजना के अवसरों का पता लगाने की उम्मीद है।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के शोधार्थी शाश्वत कुमार ने कहा, ‘‘भारत की 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाने की महत्वाकांक्षा, साथ ही निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र के खुलने से, अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ा व्यावसायिक अवसर पैदा होता है।’’

कुमार ने कहा, ‘‘भविष्य में, इस क्षमता को साकार करने के लिए समानांतर कार्रवाई पर निर्भर रहना होगा जिनमें अमेरिका से निर्यात की मंजूरी में तेजी लाना और भारत में, पुनर्संसाधन बुनियादी ढांचे की दिशा में प्रगति और अंतिम उपयोग सत्यापन संबंधी चिंताओं का समाधान शामिल है।’’

भारत-अमेरिका द्वारा 2008 में असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद, गुजरात में छायामिथी विर्दी और आंध्र प्रदेश में कोववाड़ा नामक दो स्थलों को अमेरिकी कंपनियों को 1000 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए आवंटित किया गया था।

भारत और अमेरिका छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं, जिन्हें परमाणु ऊर्जा का भविष्य माना जाता है, खासकर कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के स्थलों का पुन: उपयोग करके इन्हें आसानी से स्थापित किया जा सकता है।

वाशिंगटन स्थित एक उद्योग निकाय के कार्यक्रम अधिकारी अभिक सेनगुप्ता ने कहा, ‘‘शांति अधिनियम और ईओ14299 जैसे कानूनों ने भारत और अमेरिका दोनों में परमाणु ऊर्जा पर संवाद को पुनर्जीवित किया है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि दोनों देशों की निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में सहयोग करने के अधिक अवसर मिलेंगे।’’

भारत में, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स, अदाणी समूह, लार्सन एंड टुब्रो जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियों ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में रुचि दिखाई है।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश