नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) स्विट्जरलैंड की दवा कंपनी रॉश ने भारत में फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए त्वचा के नीचे दी जाने वाली अपनी एटजोलिजुमैब इंजेक्शन ‘टिसेंट्रिक एससी’ को पेश करने की घोषणा की है।
कंपनी ने कहा कि इससे मरीजों का अस्पतालों में बिताया जाने वाला समय कम होगा।
रॉश फार्मा इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि फेफड़ों के कैंसर के लिए यह सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे दी जाने वाली) इम्यूनोथेरेपी करीब सात मिनट में दी जा सकती है, जबकि पारंपरिक आईवी (इंट्रावीनस) इन्फ्यूजन में कई घंटे लग सकते हैं।
रॉश फार्मा इंडिया के चिकित्सा एवं नियामक मामलों के निदेशक डॉ. सिवाबालन सिवानेसन ने बताया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘दवा देने में लगने वाला समय लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है, क्योंकि इसमें किसी तरह की पूर्व तैयारी और दवा चढ़ाने के लिए प्रतीक्षा की आवश्यकता नहीं रहती।’
उन्होंने कहा, ‘इस दवा को देने की प्रक्रिया चार से आठ मिनट के बीच पूरी हो जाती है और औसतन लगभग सात मिनट लगते हैं। इसलिए कुल मिलाकर इलाज देने का समय काफी कम हो जाता है।’
सिवानेसन बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 80,000 फेफड़ों के कैंसर के मरीजों का पता चलता है, जिनमें अधिकतर मामले गंभीर अवस्था में होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘इस अनूठी दवा से यह तय होगा कि हम कितने अधिक मरीजों तक पहुंच बना सकते हैं।’
सिवानेसन ने कहा, ‘इस दवा के माध्यम से हम ऐसा नवाचार ला रहे हैं जो उपचार का समय काफी घटाता है, जबकि इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा पहले जैसी ही बनी रहती है।’
इसकी कीमत लगभग 3.7 लाख रुपये प्रति खुराक है।
भाषा रमण योगेश
रमण