नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) सरकार ने बंधुआ मजदूरी के इस्तेमाल से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) 2023 में संशोधन किया है। यह कदम अमेरिका द्वारा भारत समेत 60 देशों में बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों की जांच के बीच उठाया गया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 जुलाई की राजपत्र अधिसूचना में एक नया प्रावधान जोड़ा है। इसमें कहा गया, “पूरी तरह या आंशिक रूप से बंधुआ मजदूरी के उपयोग से निर्मित या तैयार वस्तुओं का आयात प्रतिबंधित है।”
अधिसूचना के अनुसार, यह प्रावधान आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से 30 दिन बाद प्रभाव में आएगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों पर भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ ‘धारा 301’ के तहत जांच शुरू की है। यूएसटीआर का आरोप है कि इन देशों ने बंधुआ मजदूरी के इस्तेमाल से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू नहीं किए हैं।
इस जांच के क्रम में अमेरिका ने तीन जून को भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। वहीं, कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत आयात शुल्क का प्रस्ताव है।
डीजीएफटी की अधिसूचना के मुताबिक, केंद्र सरकार जांच या अन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी भी समय ऐसे विशेष उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा सकती है, जिनके निर्माण में बंधुआ मजदूरी का इस्तेमाल पाया जाता है।
महानिदेशालय के स्तर पर ऐसे मामलों की जांच ‘प्रक्रिया पुस्तिका 2023’ के तहत निर्धारित की जाएगी।
डीजीएफटी ने प्रक्रिया पुस्तिका 2023 के अध्याय 11 (परिभाषा) में “बंधुआ मजदूरी” पर एक नया अनुच्छेद भी जोड़ा है। इसके मुताबिक, किसी व्यक्ति से दंड के भय के तहत कराया गया ऐसा कार्य या सेवा, जिसके लिए उसने स्वेच्छा से सहमति नहीं दी हो, बंधुआ मजदूरी माना जाएगा।
इस बीच, भारत और अमेरिका धारा 301 जांच से जुड़े मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर वार्ता को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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