एपीवाई में न्यूनतम पेंशन श्रेणी पर अधिक निर्भरता चिंता का विषय: वित्तीय सेवा सचिव नागराजू

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एपीवाई में न्यूनतम पेंशन श्रेणी पर अधिक निर्भरता चिंता का विषय: वित्तीय सेवा सचिव नागराजू

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 04:37 PM IST

नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) वित्तीय सेवा सचिव (डीएफएस) एम. नागराजू ने अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के तहत न्यूनतम 1,000 रुपये की श्रेणी में सर्वाधिक अंशधारक होने पर चिंता जताई है। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से लोगों को उनकी आय के मुताबिक उच्च पेंशन श्रेणी को चुनने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया है।

प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना एपीवाई से नौ करोड़ लोग जुड़ चुके हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.35 करोड़ नए अंशधारक जोड़े गए।

उन्होंने यहां पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (एफआरडीए) द्वारा आयोजित अटल पेंशन योजना वार्षिक सम्मान कार्यक्रम में कहा, ‘‘ इस उल्लेखनीय प्रगति के बीच, मुझे आपका ध्यान इस गंभीर चिंता की ओर आकर्षित करना होगा कि 1,000 रुपये मासिक पेंशन योजना में नामांकन की संख्या बेहद अधिक है।’’

नागराजू ने कहा, ‘‘ जब हम अपने नामांकन आंकड़ों का जश्न मनाते हैं, तो हमें खुद से पूछना चाहिए: क्या 20 या 30 साल बाद 1,000 रुपये प्रति माह हमारे अंशधारकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगा? एक श्रेणी में इतने लोगों का होना दर्शाता है कि नामांकन के समय हमारी परामर्श प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हमारे बैंकिंग भागीदारों को ग्राहकों को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन करना चाहिए ताकि वे एक ऐसा उपयुक्त विकल्प चुन सकें जो वास्तव में उनकी भविष्य की जरूरतों एवं वर्तमान सामर्थ्य को दर्शाता हो।’’

इसे सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए कुछ ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया जो एपीवाई ग्राहकों को जोड़ने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग साझेदारों को नियमित योगदान सुनिश्चित करने पर ध्यान देते हुए निरंतरता एवं स्थायित्व को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि एक पंजीकृत खाता जीवनभर की सुरक्षा का आधार बन सके।

नागराजू ने कहा कि अन्य शहरी क्षेत्रों में बड़ी अप्रयुक्त संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं विशेष रूप से निजी क्षेत्र के बैंकों से आग्रह करता हूं कि वे अपने शहरी नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय करें ताकि असंगठित कार्यबल, रेहड़ी पटरी वाले, डिलिवरी साझेदार और घरेलू सहायकों तक पहुंच बनाई जा सके जो हमारे शहरों की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं लेकिन उनके पास सुरक्षा नहीं है।’’

नागराजू ने कहा कि बैंकों को पेंशन के लाभ के बारे में लोगों को बताने के नए तरीके विकसित करते रहना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नागरिक चाहे उसकी साक्षरता का स्तर कुछ भी हो, वह यह समझ सके कि यह केवल बचत योजना नहीं बल्कि उनके भविष्य की गारंटी की सुरक्षा है।

उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक ने इसमें दो करोड़ ग्राहकों का ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल किया है।

वित्तीय सेवा सचिव ने साथ ही कहा, ‘‘ मैं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और निजी बैंकों की भी सराहना करना चाहता हूं।’’

इस अवसर पर पीएफआरडीए के चेयरमैन एस. रमण ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) इस योजना की पुनः समीक्षा कर रहा है कि क्या इसमें अधिक पेंशन प्रदान की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि ग्राहकों ने प्रतिक्रिया दी है कि एपीवाई के तहत 5,000 रुपये प्रति माह की ऊपरी गारंटी 15 या 20 वर्ष बाद पर्याप्त नहीं हो सकती।

रमण ने कहा कि पीएफआरडीए इस मुद्दे पर डीएफएस के साथ बातचीत करेगा और इस पर विस्तृत रिपोर्ट देगा। साथ ही इस योजना में सरकारी हिस्सा है, इसलिए कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगा।

कार्यक्रम के दौरान सचिव ने एपीवाई की सफलता के प्रति उत्कृष्ट प्रतिबद्धता दिखाने वाले कई बैंकों को सम्मानित किया। पुरस्कार पाने वाले बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं।

अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करना है। यह 60 वर्ष की आयु से 1,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति माह तक की न्यूनतम गारंटी पेंशन प्रदान करती है जो अंशदान पर आधारित है।

एपीवाई को देशभर में व्यापक रूप से लागू किया गया है। 18 मई, 2026 तक कुल नामांकन 9.10 करोड़ से अधिक था।

भाषा निहारिका अजय

अजय