शिमला/सोलन, 28 सितंबर (भाषा) मिट्टी के कटाव को बांधने और रोकने के लिए राज्य की राजधानी शिमला में भूस्खलन संभावित ढलानों पर तेजी से बढ़ने वाली घास, वेटिवर और नेपियर तथा शीतोष्ण बांस की किस्मों को लगाया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) ने उन स्थानों पर वृक्षारोपण के लिए शीतोष्ण बांस के 1,000 गुच्छे और वेटिवर और नेपियर घास के 10,000 गुच्छे उपलब्ध कराए हैं, जहां मानसून के दौरान भूस्खलन हुआ था।
शिमला नगर निगम के मेयर सुरिंदर चौहान ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि मिट्टी के कटाव को रोकने और पहले से मौजूद पेड़ों को मजबूती देने के लिए 7-8 संवेदनशील स्थानों पर वेटिवर और नेपियर घास और शीतोष्ण बांस लगाए गए हैं।
बांस ऊपरी मिट्टी को बांधने और ढलानों, नदी तटों और ख़राब भूमि के कटाव को रोकने के लिए उपयोगी है जो अक्सर भूस्खलन से प्रभावित होते हैं।
नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि इसी प्रकार, वेटिवर और नेपियर घास की किस्मों में मिट्टी को बांधने की क्षमता होती है और इन प्रजातियों के रोपण से मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है और मिट्टी को बांधने के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य किया जा सकता है।
अगस्त महीने में भारी बारिश के बाद शिमला में तीन बड़े भूस्खलनों में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय