उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा, ई85 और ई100 के लिए नियमों में ढील का प्रस्ताव

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उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा, ई85 और ई100 के लिए नियमों में ढील का प्रस्ताव

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 08:24 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 08:24 PM IST

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने उच्च एथनॉल मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इस कदम से सभी वाहन श्रेणियों में फ्लेक्स-फ्यूल और शुद्ध बायोफ्यूल वाहनों के इस्तेमाल की राह आसान होगी।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में प्रस्तावित संशोधनों के तहत ई85 (पेट्रोल में 85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण), ई100 (लगभग पूरी तरह एथनॉल वाला ईंधन), बी100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी जैसे ईंधनों के उपयोग को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।

भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण (ई20) का लक्ष्य हासिल कर चुका है। इसे गन्ना, मक्का या चावल जैसे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है।

मंत्रालय की तरफ से 27 अप्रैल को जारी राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, इन प्रस्तावों पर 30 दिनों तक सार्वजनिक परामर्श किया जाएगा, जिसमें हितधारक अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे।

प्रस्तावित संशोधनों में हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए वजन सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम करने का प्रावधान भी किया गया है। इससे वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक वैन, पिकअप और छोटे ट्रक एकसमान उत्सर्जन परीक्षण के दायरे में आ जाएंगे।

संशोधन के तहत ई20, ई85, ई100 और बी100 जैसे उच्च जैव-ईंधन मिश्रणों को औपचारिक मान्यता दी गई है। अब तक नियम मुख्य रूप से ई10 और ई20 तक ही सीमित थे।

अधिसूचना में वाहन ईंधन की परिभाषाओं और मानकों को भी अद्यतन किया गया है, जिसमें ‘हाइड्रोजन प्लस सीएन’ को ‘हाइड्रोजन प्लस सीएनजी’ से बदलना और उत्सर्जन तीव्रता के माप को ‘मिलीग्राम/किलोवाटघंटा’ के रूप में दुरूस्त करना शामिल है।

इसके अलावा, वास्तविक परिस्थितियों में इंजन से निकलने वाले प्रदूषकों की अधिकतम अनुमेय सीमा को भी 60 से संशोधित कर 600 कर दिया गया है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण