नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह में शीर्ष स्तर पर प्रभाव और नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान के बीच उनके करीबी रहे कई वरिष्ठ लोगों के समूह से अलग होने से देश के इस प्रमुख कारोबारी समूह के सत्ता संतुलन में बदलाव की स्थिति बनती नजर आ रही है।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को कहा कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद 20 फरवरी, 2027 को चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उनका यह फैसला रतन टाटा के करीबी रहे विजय सिंह और मेहली मिस्त्री के टाटा समूह से धीरे-धीरे अलग होने के बाद आया है।
इस विवाद के केंद्र में टाटा ट्रस्ट्स हैं, जिनके पास समूह की मूल कंपनी टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है जबकि नमक से लेकर सेमीकंडक्टर तक के कारोबार से जुड़े समूह पर टाटा ट्रस्ट्स का निर्णायक प्रभाव है।
टाटा ट्रस्ट्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की 27.98 प्रतिशत है जबकि सर रतन टाटा ट्रस्ट की 23.56 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस तरह इन दोनों ट्रस्ट की सम्मिलित हिस्सेदारी 51.54 प्रतिशत है जो कि निर्णायक हो जाती है।
वर्ष 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल एन टाटा अक्टूबर, 2024 से टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन होने के अलावा टाटा संस के गैर-कार्यकारी निदेशक भी हैं।
टाटा संस के छह-सदस्यीय निदेशक मंडल में चंद्रशेखरन, नोएल टाटा, टाटा समूह के वरिष्ठ अधिकारी एवं टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, समूह के मुख्य वित्त अधिकारी सौरभ अग्रवाल और स्वतंत्र निदेशक हरीश मनवानी एवं अनीता मरंगोली जॉर्ज शामिल हैं।
टाटा ट्रस्ट्स के भीतर 2025 के दौरान मतभेद बढ़े। इसका एक गुट नोएल टाटा के साथ रहा, जबकि मिस्त्री की अगुवाई वाले दूसरे गुट में प्रमीत झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा शामिल थे। मिस्त्री के विस्तारित शापूरजी पालोनजी परिवार से संबंध भी विवाद का एक पहलू रहे हैं। इस परिवार के पास टाटा संस की करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
विवाद का प्रमुख मुद्दा टाटा संस के निदेशक मंडल की संरचना और निदेशक पदों का बंटवारा रहा। टाटा संस के भविष्य में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का सवाल भी मतभेद का एक प्रमुख कारण रहा। नोएल टाटा सूचीबद्धता के खिलाफ रहे हैं, जबकि श्रीनिवासन एवं सिंह सार्वजनिक रूप से इसका समर्थन कर चुके हैं।
इस बीच, टाटा संस के निदेशक मंडल में भी बदलाव हुए। पूर्व रक्षा सचिव और टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशक विजय सिंह ने 2025 में बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। स्वतंत्र निदेशक अजय पीरामल और राल्फ स्पेथ भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मिस्त्री ने रतन टाटा द्वारा स्थापित निवेश कंपनी आरएनटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड से भी इस्तीफा दे दिया।
इस साल अप्रैल में श्रीनिवासन ने बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया था।
मंगलवार को सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद का नवीनीकरण नहीं कराने का फैसला किया। उनका मौजूदा कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा है। हालांकि, वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने रहेंगे।
टाटा ट्रस्ट्स में बढ़ते मतभेदों के बीच पिछले साल अक्टूबर में नोएल टाटा, चंद्रशेखरन, श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात भी की थी।
इस घटनाक्रम के बीच चंद्रशेखरन ने बुधवार को कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनका कार्यकाल पांच साल बढ़ाने की सिफारिश की थी। टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और बोर्ड ने भी इसकी अनुशंसा की, लेकिन 24 फरवरी की बोर्ड बैठक में एक निदेशक का समर्थन नहीं मिलने से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘सर्वसम्मति से समर्थन नहीं मिलने पर मैंने फैसला टालने का विकल्प चुना। लेकिन छह महीने बाद भी कोई समाधान नहीं निकलने पर कर्मचारियों, निवेशकों, भागीदारों और अन्य हितधारकों के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी थी।’’
उन्होंने बोर्ड को सूचित कर दिया है कि वह 20 फरवरी, 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद पर पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं करेंगे। उन्होंने निदेशकों से अपने उत्तराधिकारी पर जल्द फैसला करने को भी कहा ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारू रूप से हो सके।
चंद्रशेखरन का यह फैसला टाटा संस के शीर्ष नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों के बीच अब नए चेयरमैन का चयन समूह के भविष्य के नेतृत्व और शासन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।
टाटा संस की केंद्रीय भूमिका और ट्रस्ट्स की बहुलांश हिस्सेदारी के कारण इस समूची प्रक्रिया पर समूह के दीर्घकालिक दिशा-निर्धारण के संदर्भ में नजर रहेगी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय