कर्ज के जरिये खरीदे गए वाहन जब्त करने के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करे आरबीआई: न्यायालय

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कर्ज के जरिये खरीदे गए वाहन जब्त करने के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करे आरबीआई: न्यायालय

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 08:46 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 08:46 PM IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश दिया कि वह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए जारी अपने दिशानिर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू कराए, ताकि वे कर्ज लेकर खरीदे गए वाहनों को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना छीन न सकें।

न्यायालय ने आरबीआई के उस निर्देश का हवाला दिया कि कर्ज लेकर खरीदे गए वाहन को केवल ‘कानूनी तरीके’ से ही जब्त किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कर्ज लेकर लिए गए किसी वाहन को केवल ‘कानूनी तरीके’ से ही अपने कब्जे में ले सकते हैं। कर्जदार के ऋण चुकाने में चूक करने के बावजूद वाहन जब्त करने के लिए बल, चोरी-छिपे कार्रवाई या मनमाना तरीका नहीं अपनाया जा सकता।

न्यायालय ने यह बात अपने फैसले में कही। फैसले में उसने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लि. को ट्रक मालिक का ऋण खाता बंद करने और उसके वाहन की बिक्री से मिली 4.5 लाख रुपये की राशि छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया।

शीर्ष अदालत ने वित्तीय कंपनी को वाहन को अनधिकृत तरीके से अपने कब्जे में लेने से हुई मानसिक परेशानी और आजीविका के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। साथ ही मुकदमा खर्च के रूप में 50,000 रुपये देने को कहा।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि कर्जदार के भुगतान में चूक करने के बावजूद वित्तीय संस्थान कर्ज की वसूली के लिए बल, चोरी-छिपे कार्रवाई या मनमाने तरीके नहीं अपना सकते।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा की ओर से लिखे गए फैसले में कहा गया, ‘‘यदि कर्ज समझौते में वित्तपोषित वाहन पर कब्जा लेने का अधिकार दिया गया है तो सामान्य तौर पर वित्तीय संस्थान उस अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, यह अधिकार तब लागू नहीं हो सकता जब समझौते की शर्तें अनुचित हों या जनहित के खिलाफ हों।’’

फैसले में कहा गया, ‘‘वाहन को अपने स्तर पर वापस लेने की ऐसी शर्तें अपने आप में गलत नहीं हैं। ये शर्तें वित्तीय संस्थानों के लिए उस वाहन को ही ऋण की गारंटी मानकर कम आय वाले कर्जदारों, ट्रक मालिकों और छोटे परिवहन कारोबारियों को ऋण देना व्यावहारिक बनाती हैं, जिनके पास आम तौर पर कोई दूसरी संपत्ति गारंटी के रूप में नहीं होती और वे संस्थागत ऋण से वंचित रह सकते हैं।’’

हालांकि, पीठ ने कहा कि अदालत या न्यायाधिकरण की निगरानी के बिना इस अधिकार का उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। यदि इस पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसे चोरी-छिपे, बलपूर्वक या रात में वाहन जब्त करने की खुली छूट के रूप में लिया जा सकता है। इससे वित्तीय समावेश के लिए बनाई गई व्यवस्था उसी वर्ग के लोगों पर दबाव का साधन बन सकती है, जिसके लिए इसे तैयार किया गया है।

पीठ ने आरबीआई के विभिन्न मुख्य परिपत्रों, दिशानिर्देशों और स्पष्टीकरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कर्ज की वसूली कानून के अनुसार और निष्पक्ष तरीके से करनी चाहिए तथा कर्जदारों को परेशान या उनके खिलाफ बल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

न्यायालय ने कहा, ‘‘एनबीएफसी और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देश और मुख्य परिपत्र अबतक केवल कागजों पर रहे हैं और उन्हें लागू कराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।’’

पीठ ने आरबीआई को इनका वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।

आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, कर्जदाता और वसूली एजेंट कर्जदारों को धमका या परेशान नहीं कर सकते। उन्हें असामान्य समय पर संपर्क करने या बल प्रयोग करने से भी रोका गया है। वाहन जब्त करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है और बैंक गुंडों के जरिये या बलपूर्वक वाहन पर कब्जा नहीं कर सकते।

आरबीआई ने बैंकों से वसूली एजेंट की नियुक्ति के समय उचित जांच करने और यह सुनिश्चित करने को भी कहा है कि वे उसके दिशानिर्देशों का पालन करें। ऋण समझौते में भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुरूप कानूनी रूप से वैध वाहन जब्ती की शर्तें होनी चाहिए।

यह फैसला हरि दत्त शर्मा के मामले में आया। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्जदार की याचिका खारिज कर दी गई थी।

मामला चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लिए गए वाणिज्यिक वाहन ऋण से संबंधित टाटा एसएफसी 407 ट्रक का था। कर्जदार ने 10.40 लाख रुपये का ऋण लिया था, जिसमें से 9.36 लाख रुपये दिए गए थे। बाद में उसे 1.04 लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण भी मिला। ऋण की सुरक्षा के तौर पर ट्रक को गिरवी रखा गया था।

ऋण चुकाने में चूक के बाद वित्तीय कंपनी ने अप्रैल, 2023 में ट्रक अपने कब्जे में ले लिया। कर्जदार ने आरोप लगाया कि चार अज्ञात लोगों ने नौ अप्रैल, 2023 को रात करीब एक बजे ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़कर उसे ले गए और इसके लिए समझौते में तय नोटिस भी नहीं दिया गया था। उसने उसी दिन खोई वस्तु की रिपोर्ट और ई-एफआईआर दर्ज कराई।

कंपनी ने बाद में कर्जदार को बताया कि ट्रक को 31 अगस्त, 2023 को 4.5 लाख रुपये में बेच दिया गया। उसका दावा था कि कर्जदार पर 5.71 लाख रुपये बकाया हैं और उससे शेष राशि का भुगतान करने को कहा गया।

शीर्ष अदालत ने ऋण समझौते में वाहन पर कब्जा लेने से जुड़ी शर्त की भी जांच की। समझौते में वाहन पर कब्जा लेने से पहले सात दिन का नोटिस देना जरूरी था।

न्यायालय ने कहा कि समझौते की शर्त आरबीआई के दिशानिर्देशों और भारतीय संविदा अधिनियम के अनुरूप नहीं थी।

भाषा रमण अजय

अजय