वितरण कंपनियों के लिये घोषित पैकेज के तहत 1.18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर

वितरण कंपनियों के लिये घोषित पैकेज के तहत 1.18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर

वितरण कंपनियों के लिये घोषित पैकेज के तहत 1.18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:23 pm IST
Published Date: November 12, 2020 2:57 pm IST

नयी दिल्ली, 12 नवंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लि. ने वित्तीय दबाव में फंसी बिजली वितरण कंपनियों के लिये उपलब्ध कराये गये नकदी राहत पैकेज के तहत अब तक 1.18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किये हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल मई में नकदी समस्याओं और कोविड-19 संकट के कारण मांग में नरमी से जूझ रही वितरण कंपनियों के लिये 90,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।

बिजली मंत्रालय ने बाद में पैकेज को बढ़ाकर 1.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया।

पीएफसी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ‘‘कंपनी और उसकी अनुषंगी आरईसी लि. ने पात्र वितरण कंपनियों के लिये नकदी पैकेज योजना के तहत 31 अक्टूबर, 2020 तक 1,18,273 करोड़ रुपये कर्ज को मंजूरी दी है।’’

कंपनी ने कहा कि पैकेज के तहत कर्ज का वित्त पोषण पीएफसी और आरईसी समान अनुपात में करेगी। कर्ज की मंजूरी दो समान किस्तों में दी जाएगी।

दोनों कंपनियों ने पैकेज के तहत करीब 31,100 करोड़ रुपये वितरित किये हैं।

वितरण कंपनियों को नकदी उपलब्ध कराने की केंद्र की योजना के तहत आरईसी और पीएफसी रियायती ब्याज दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। पैकेज की घोषणा 13 मई, 2020 को की गयी थी।

वितरण कंपनियों को उत्पादक और पारेषण कंपनियों के बिलों के भुगतान के लिये नकदी की जरूरत है।

बिजली मंत्रालय के प्राप्ति पोर्टल के अनुसार वितरण कंपनियों के ऊपर कुल बकाया सितंबर महीने 1.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

बिजली उत्पादक कंपनियां वितरण इकाइयों को विद्युत आपूर्ति बिलों के भुगतान के लिये 45 दिन का समय देती है। उसके बाद बकाया पिछला बकाया बन जाता है और उत्पादक कंपनियां उस पर ब्याज जोड़ती हैं।

इस प्रकार का पिछला बकाया कुल 1.38 लाख करोड़ रुपये के बकाये में से सितंबर 2020 में 1.26 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

पैकेज से वितरण कंपनियों को अपने बकाये के निपटान में मदद मिलेगी। इसके अलावा बिजली उत्पादक कंपनियों तथा पारेषण कंपनियों को बकाया राशि मिलने से उन पर दबाव भी कम होगा।

भाषा

रमण महाबीर

महाबीर


लेखक के बारे में