लखनऊ, दो अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ‘टाइपिंग’ की एक मामूली सी गलती के कारण पेट्रोल पंप की डीलरशिप छीने जाने की नौबत आने के मामले में हस्तक्षेप करते हुए भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के एक आदेश को ‘अन्यायपूर्ण’ और ‘कानूनी तौर पर गलत’ बताते हुए रद्द कर दिया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को बीपीसीएल के आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत राघवेंद्र अवस्थी को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में पेट्रोल पंप खोलने के लिए जारी किया गया ‘आशय पत्र’ रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि ‘आशय पत्र’ रद्द करने का फैसला पूरी तरह से एक विज्ञापन में हुई लिपिकीय गलती पर आधारित था, जो ‘अन्यायपूर्ण’ और कानून के खिलाफ था।
मामले के मुताबिक अवस्थी को 2020 में ‘आशय पत्र’ दिया गया था और उन्होंने डीलरशिप शुरू करने के लिए काफी धन लगाकर सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। हालाकि, जनवरी 2022 में बीपीसीएल ने विज्ञापन में हुई एक गलती का हवाला देते हुए आवंटन रद्द कर दिया।
विज्ञापन में प्रस्तावित जगह के पास वाली सड़क को ओडीआर (अन्य जनपदीय सड़क) के बजाय एमडीआर (मुख्य जनपदीय सड़क) बताया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह गलती पूरी तरह से ‘टाइपिंग’ की थी और इससे प्रस्तावित पेट्रोल पंप की जगह को लेकर कोई भ्रम पैदा नहीं हुआ था।
अदालत ने कहा कि इस गलती की वजह से किसी भी संभावित आवेदक को आवेदन करने के मौके से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अवस्थी ने बीपीसीएल के भरोसे पर काम किया था और वित्तीय निवेश किया था, जिससे उन्हें यह उम्मीद थी कि आवंटन का सम्मान किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि ऐसी उम्मीद को किसी तकनीकी आधार पर मनमाने ढंग से खत्म नहीं किया जा सकता।
पीठ ने आशय पत्र रद्द करने के 29 जनवरी 2022 के आदेश को खारिज करते बीपीसीएल को निर्देश दिया कि वह अवस्थी को जारी किया गया आशय पत्र बहाल करे और आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।
भाषा सं सलीम राजकुमार
राजकुमार