टाटा समूह के विवाद में नोएल टाटा के समर्थन में आए शरद पवार

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टाटा समूह के विवाद में नोएल टाटा के समर्थन में आए शरद पवार

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 06:59 PM IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच छिड़े विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा का परोक्ष रूप से समर्थन करते हुए कहा कि समूह की सामाजिक प्रतिबद्धता और संस्थागत भूमिका को बनाए रखना जरूरी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि समूह में नेतृत्व से जुड़े मौजूदा मसले को उचित प्रक्रिया, बातचीत और कंपनी की नियमावली के जरिये सुलझाया जाना चाहिए।

पवार ने कहा कि टाटा समूह की ट्रस्ट-आधारित विरासत की रक्षा करना समय की मांग है और भारत के विकास में इसके योगदान को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा समूह की विरासत इस विश्वास में निहित है कि व्यवसाय को समाज की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थापित प्रशासनिक ढांचे के तहत टाटा ट्रस्ट की संस्थागत भूमिका और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

टाटा संस के निदेशकों ने 17 सितंबर को एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में फिर से नियुक्त करने के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन समूह में सामूहिक रूप से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने कुछ ही घंटों के भीतर इस मतदान को अमान्य घोषित कर दिया। चार निदेशकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि नोएल टाटा ने इसके विरोध में मतदान किया था।

इसके साथ ही टाटा संस के निदेशक मंडल ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। नोएल टाटा ने टाटा संस की सार्वजनिक सूचीबद्धता का कड़ा विरोध किया है ताकि समूह के पारंपरिक परमार्थ और परोपकारी स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सके।

पवार ने ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में पिछले सप्ताह टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए निर्णयों से जुड़ी चिंताओं को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा स्थापित प्रमुख संस्थानों में टाटा मेमोरियल अस्पताल, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) और नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) मुंबई में स्थित हैं। ये संस्थान काफी हद तक टाटा ट्रस्ट की स्थिरता और प्रबंधन पर ही निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य को इन प्रतिष्ठित परमार्थ ट्रस्ट की मेजबानी करने पर गर्व है। ट्रस्ट को कमजोर करने से वे संस्थान कमजोर होंगे जिन पर देश और राज्य की जनता निर्भर है। एक सदी से भी अधिक समय से ये ट्रस्ट ऐसे मालिक रहे हैं, जिन्होंने अल्पकालिक मुनाफे से ऊपर मूल्यों और साख को रखा है। इसी धैर्य की वजह से टाटा के नाम पर जनता का भरोसा कायम है।”

इसके साथ ही पवार ने कहा कि टाटा समूह महाराष्ट्र की जड़ों से जुड़ा एक राष्ट्रीय संस्थान है, और इसके परोपकारी स्वामित्व की रक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘चेयरमैन के चयन सहित सभी बड़े फैसलों में ट्रस्ट के नामित निदेशकों की सहमति अनिवार्य करने वाले नियमों का सम्मान होना चाहिए। विवादों के बजाय बातचीत और उचित प्रक्रिया के जरिये, बहुलांश मालिक के रूप में टाटा ट्रस्ट की सहमति से नेतृत्व के फैसले सुलझाए जाने चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कॉरपोरेट संचालन के लिहाज से भी किसी कंपनी को नियम ही संचालित करते हैं। समूह की नियमावली बहुलांश मालिक के नामितों को चेयरमैन चुनने में निर्णायक भूमिका देती है। इस व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि यह टाटा समूह की मूल संरचना है। हमें उस समूह की रक्षा करनी चाहिए, जिसने खुद को भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया।’’

पवार ने कहा, ‘‘टाटा ट्रस्ट के जरिये बनाए गए इस परोपकारी स्वामित्व ढांचे की रक्षा की जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि जमशेदजी टाटा की दूरदृष्टि, जिसे सर दोराबजी और सर रतन टाटा ने आगे बढ़ाया, यह थी कि उद्यम द्वारा अर्जित संपत्ति समाज को वापस लौटनी चाहिए। उनके शेयर विशेष रूप से ट्रस्ट में इसलिए रखे गए थे ताकि कोई एक व्यक्ति समूह का मालिक न बने, और कारोबार का बहुलांश हिस्सा ऐसे ट्रस्ट के पास रहे जो परोपकार के लिए समर्पित हैं।

भाषा अजय पाण्डेय प्रेम

अजय