नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जर्मनी मुख्यालय वाली एक कंपनी को यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रतिबंधों के बावजूद रोसनेफ्ट समर्थित पेट्रोलियम कंपनी नायरा एनर्जी लिमिटेड की सॉफ्टवेयर सहायता सेवाएं तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि नायरा एनर्जी भारत की ऊर्जा जरूरतों का करीब आठ प्रतिशत पूरा करती है और इस तरह की महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए तकनीकी सहायता सेवाओं का निर्बाध प्रवाह बहुत जरूरी है।
अदालत ने नायरा एनर्जी द्वारा एसएपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश 21 सितंबर को दिया था।
नायरा एनर्जी लिमिटेड (पूर्व में एस्सार ऑयल लिमिटेड) ने आरोप लगाया था कि दोनों कंपनियों के बीच समझौता होने के बावजूद एसएपी इंडिया ने जुलाई, 2025 में एकतरफा रूप से उसकी तकनीकी सहायता सेवाओं तक पहुंच रोक दी थी।
रोसनेफ्ट रूसी पेट्रोलियम कंपनी है।
शिकायतकर्ता कंपनी को बताया गया था कि उसका नाम यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता को कमजोर करने या खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों के संबंध में लगाए गए ‘‘ईयू प्रतिबंधों की सूची’’ में शामिल किया गया है। एसएपी इंडिया ने कहा था कि ईयू मुख्यालय वाली कंपनी होने के कारण उसे इन प्रतिबंधों के अनुपालन के लिए तत्काल कदम उठाने पड़े।
नायरा एनर्जी देश में एक बड़ी तेल रिफाइनरी का संचालन करती है और देशभर में इसका ईंधन खुदरा नेटवर्क है।
अदालत ने कहा कि सहायता सेवाओं का एकतरफा और अचानक निलंबन प्रथम दृष्टया अवैध था और दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था। अदालत ने कहा कि अंतरिम राहत के स्तर पर एसएपी इंडिया भारतीय कानून के तहत अपने संविदात्मक दायित्वों से बचने के लिए ईयू नियमों का सहारा नहीं ले सकती।
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘आवेदन स्वीकार किया जाता है और प्रतिवादी संख्या-1 (एसएपी इंडिया) को निर्देश दिया जाता है कि वह 24 जुलाई, 2025 से पहले की स्थिति बहाल करते हुए संबंधित समझौतों के तहत वादी को सभी एंटरप्राइज और सॉफ्टवेयर सहायता सेवाएं तुरंत फिर से शुरू करे।’’
भाषा यासिर अजय
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