नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर को यथावत रखने के निर्णय से ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे कारोबारियों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों ने यह बात कही।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक आर्थिक माहौल में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वृद्धि गति को बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही महंगाई से जुड़े जोखिम अभी बने हुए हैं, इसलिए आगे के नीतिगत फैसले उपलब्ध आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।
उद्योग मंडल एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद में केंद्रीय बैंक के भरोसे को दर्शाता है। नीतिगत दरों में स्थिरता से कारोबारी भरोसा मजबूत होगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक वृद्धि की गति बनी रहेगी।
मिंडा ने कहा कि आरबीआई का यह कदम आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने, मूल्य स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय प्रणाली की मजबूती सुनिश्चित करने के बीच संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह नीति कंपनियों के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराएगी। इससे आने वाले महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि को और मजबूती मिलेगी।’’
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीईओ एवं महासचिव रंजीत मेहता ने कहा, ‘यह नीति अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद उभरते जोखिमों को लेकर संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वैश्विक अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन आरबीआई का फैसला बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप है।’
आनंद राठी समूह के मुख्य अर्थशास्त्री एवं कार्यकारी निदेशक सुजान हाजरा ने कहा कि आरबीआई ने फिलहाल नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया है, लेकिन वह पूरी तरह निश्चिंत भी नहीं है।
उनके अनुसार, रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और तटस्थ रुख बरकरार रखने से यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, जबकि दरों में और कटौती की गुंजाइश सीमित हो गई है।
उन्होंने कहा कि असमान मानसून, खाद्य कीमतों में फिर बढ़ता दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मुद्रास्फीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय और स्पष्ट संकेत मिलने का इंतजार करेगा।
उनके अनुसार, नीतिगत स्थिरता बाजारों के लिए सकारात्मक है, हालांकि शेयर बाजार की दीर्घकालिक मजबूती कॉरपोरेट आय, निवेश गतिविधियों और मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी।
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (बीवाईएसटी) की संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि मजबूत रहने के साथ-साथ उभरते मुद्रास्फीति संबंधी दबावों के बीच रेपो दर को यथावत रखना संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘संसद के मानसून सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) संशोधन विधेयक, 2026 पर विचार के बीच नीतिगत स्थिरता से छोटे उद्यमियों को कर्ज लागत, कार्यशील पूंजी, ऋण भुगतान और निवेश संबंधी फैसलों में स्पष्टता मिलेगी। हालांकि, नीतिगत ब्याज दर को यथावत रखने का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इस फैसले का प्रभावी ढंग से ग्राहकों तक पहुंचाएं।’’
क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का रेपो दर और नीतिगत रुख को यथावत रखने का फैसला बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि जून की तुलना में वृद्धि और मुद्रास्फीति के आकलन में मामूली सुधार हुआ है। चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान 0.1 प्रतिशत बढ़ाया गया है जबकि मुद्रास्फीति का अनुमान 0.1 प्रतिशत घटाया गया है।
जोशी ने कहा कि जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से ऊपर चली गई थी, जिसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी तथा तुलनात्मक आधार प्रभाव था।
उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति अभी भी नियंत्रण में है जिससे संकेत मिलता है कि मांग आधारित मूल्य दबाव व्यापक नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग तथा कंपनियों और बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर वित्तीय स्थिति के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी वाइस चेयरमैन उमेश रेवणकर ने कहा कि रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का आरबीआई का फैसला संतुलित और व्यावहारिक है।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में हाल की बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण है तथा इसके व्यापक स्तर पर अर्थव्यवस्था में फैलने के संकेत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की मजबूत बिक्री से ग्रामीण और छोटे शहरों में मांग की मजबूती का संकेत मिलता है। हालांकि मानसून को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
छोटे उद्यमों के लिए पूंजी जुटाने की सुविधा देने वाला मंच ‘गेटफाइव’ के सह-संस्थापक श्रीकांत गोयल ने कहा, ‘‘आरबीआई द्वारा रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय वैश्विक ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता का संकेत देता है। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए यह फैसला दीर्घकालिक पूंजी योजना तथा कारोबार विस्तार के लिए आवश्यक भरोसा और स्पष्टता प्रदान करता है…।’’
भाषा योगेश रमण निहारिका
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