राज्य सेवारत कर्मचारियों, पेंशनधारकों के बीच महंगाई भत्ते में भेदभाव नहीं कर सकता: न्यायालय

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राज्य सेवारत कर्मचारियों, पेंशनधारकों के बीच महंगाई भत्ते में भेदभाव नहीं कर सकता: न्यायालय

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  • Publish Date - April 10, 2026 / 08:26 PM IST,
    Updated On - April 10, 2026 / 08:26 PM IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य महंगाई भत्ते को बढ़ाते समय सेवारत कर्मचारियों और पेंशनधारकों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता।

सेवानिवृत्त लोगों के समानता के अधिकार को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केरल सरकार और केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया।

न्यायालय ने साफ किया कि महंगाई का प्रभाव सेवारत और सेवानिवृत्त, दोनों कर्मचारियों पर समान रूप से पड़ता है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने फैसले में लिखा, ”समानता एक गतिशील अवधारणा है और इसे पारंपरिक सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता। वास्तव में, समानता और मनमानापन एक-दूसरे के एकदम विपरीत हैं, एक गणराज्य में कानून के शासन का हिस्सा है, जबकि दूसरा एक निरंकुश शासक की सनक है।”

संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए फैसले में कहा गया कि इसमें ‘वर्ग विधान’ का निषेध किया गया है, लेकिन ‘तार्किक वर्गीकरण’ की अनुमति की गई है। इसे दो परीक्षणों पर खरा उतरना चाहिए: वर्गीकरण एक सुविचारित अंतर पर आधारित होना चाहिए और इस अंतर का उस उद्देश्य के साथ तर्कसंगत संबंध होना चाहिए, जिसे हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

पीठ ने कहा, ”यहां सेवानिवृत्त कर्मचारी न केवल पेंशन के बल्कि ‘महंगाई राहत’ (डीआर) के भी हकदार हैं, जो महंगाई के आधार पर समय-समय पर संशोधित होती है। मुद्दा लाभ की पात्रता का नहीं, बल्कि अलग-अलग दरों का है।”

न्यायालय ने कहा कि जब ये लाभ एक साझा उद्देश्य के लिए दिए जाते हैं और महंगाई से जुड़े होते हैं, तो सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अलग-अलग दरें तय करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण