एआई, डेटा विश्लेषण जैसी प्रौद्योगिकी जीएसटी में कर चोरी का पता लगाने में मददगार: वित्त मंत्रालय

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एआई, डेटा विश्लेषण जैसी प्रौद्योगिकी जीएसटी में कर चोरी का पता लगाने में मददगार: वित्त मंत्रालय

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 07:40 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 07:40 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत संभावित कर चोरी का पता लगाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा विश्लेषण जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इन प्रौद्योगिकियों की मदद से ईमानदार करदाताओं के लिए नियम-कायदों के अनुपालन को आसान बनाया जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के 66.5 लाख से बढ़कर मई, 2026 तक 1.65 करोड़ हो गई है, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिक स्वरूप के विस्तार को दर्शाता है।

साथ ही, सकल जीएसटी संग्रह भी लगातार बढ़ा है। वर्ष 2017-18 में यह लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले पांच वर्षों में जीएसटी संग्रह 2021-22 के 13.76 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 22.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-मई में जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा।

जीएसटी एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसने केंद्र और राज्यों के 17 अलग-अलग करों तथा 13 उपकरों की जटिल व्यवस्था को समाप्त कर एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू की। यह सुधार केंद्र और राज्यों के बीच वर्षों तक चली बातचीत के बाद लागू किया गया था और इसका उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा के तहत पूरे देश के लिए एक समान राष्ट्रीय बाजार बनाना था।

पिछले नौ वर्षों में जीएसटी प्रणाली डेटा-आधारित कर प्रशासन और प्रौद्योगिकी-आधारित ढांचे की ओर तेजी से बढ़ी है।

मंत्रालय ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और डेटा विश्लेषण जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग अब अधिक लक्षित निगरानी के लिए किया जा रहा है। इनकी मदद से आंकड़ों के रुझान और जोखिम संकेतकों का विश्लेषण कर संभावित कर चोरी की पहचान की जाती है।

भाषा योगेश अजय

अजय