नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने बृहस्पतिवार को दूरसंचार कंपनियों के लिए ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। इसमें नियमों के उल्लंघन के मामलों में दूरसंचार कंपनियों पर प्रति तिमाही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्तावित दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026 के तहत सेवा प्रदाताओं के वेब पोर्टल, ऐप और चैटबॉट पर स्पष्ट शिकायत पंजीकरण सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही पंजीकृत शिकायतों पर की गई कार्रवाई के बारे में उपभोक्ताओं को नियमित रूप से जानकारी प्रदान की जाएगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के मसौदा पत्र के मुताबिक, यदि शिकायत की पड़ताल में यह पाया जाता है कि किसी शिकायत या अपील को अनुचित तरीके से खारिज किया गया है या असंतोषजनक ढंग से निपटाया गया है तो सेवा प्रदाता पर अनुचित तरीके से निपटान वाली हरेक शिकायत के मामले में 1,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
नियमों के मसौदे में कहा गया है कि सेवा प्रदाता द्वारा अपील को अनुचित तरीके से खारिज करने या निपटाने की स्थिति में, प्रत्येक गड़बडी के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि इसके लिए शर्त है कि किसी सेवा प्रदाता द्वारा देय अधिकतम जुर्माना राशि लाइसेंस प्राप्त/अधिकृत सेवा क्षेत्र के लिए प्रति तिमाही 50 लाख रुपये से अधिक न हो।
मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि प्रत्येक सेवा प्रदाता यह सुनिश्चित करेगा कि उपभोक्ता उनके वेब पोर्टल, वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से शिकायतें या अपीलें दर्ज करा सकें और अनुरोध या प्रश्न उठा सकें।
दूरसंचार संचालकों को ग्राहकों को अपनी संचार की श्रेणी चुनने का विकल्प प्रदान करना होगा, जिसमें शिकायत, अपील, सेवा अनुरोध या प्रश्न शामिल हैं।
दूरसंचार नियामक ने इस पर पांच जून तक टिप्पणियां आमंत्रित की है।
भाषा रमण प्रेम
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