भारत-ईयू एफटीए में निवेश उदारीकरण का अध्याय जोड़ने की जरूरत: यूरोपीय संघ राजदूत

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भारत-ईयू एफटीए में निवेश उदारीकरण का अध्याय जोड़ने की जरूरत: यूरोपीय संघ राजदूत

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 09:51 PM IST

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) भारत में यूरोपीय संघ (ईयू) के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने बृहस्पतिवार को भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में निवेश उदारीकरण से जुड़े अध्याय को शामिल करने और निवेश संरक्षण समझौते को जल्द पूरा करने का आग्रह किया।

डेल्फिन ने कहा कि प्रस्तावित एफटीए में कई अहम क्षेत्र शामिल हैं लेकिन इसमें कुछ ‘अधूरे पहलू’ भी हैं, जिनमें निवेश प्रमुख है। उन्होंने कहा कि गैर-सेवा क्षेत्रों में निवेश उदारीकरण का अध्याय शामिल होने से निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।

डेल्फिन ने यह बात भारत में यूरोपीय व्यापार संघ (एफईबीआई) के सदस्यों की बैठक में कही। इस दौरान भारत-ईयू एफटीए पर चर्चा की गई।

भारत और 27 यूरोपीय देशों के समूह ईयू ने 27 जनवरी को एफटीए पर वार्ता पूरी करने की घोषणा की थी। इस समझौते से भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी जबकि यूरोप से लक्जरी कारों एवं वाइन का आयात सस्ता होगा।

दोनों पक्ष इस समय 1,000 से अधिक पृष्ठों वाले समझौते की कानूनी समीक्षा में लगे हुए हैं, जिसे जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समझौते के इसी वर्ष संपन्न होने और 2027 की शुरुआत में लागू हो जाने की संभावना है।

डेल्फिन ने कहा कि यूरोपीय कंपनियां भारत में पहले से निवेश कर रही हैं और आगे निवेश बढ़ाने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अनुकूल माहौल जरूरी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि एफटीए लागू होने के दो साल बाद समीक्षा के दौरान निवेश उदारीकरण के मुद्दे पर फिर विचार किया जा सकता है।

इसके साथ ही ईयू के राजदूत ने निवेश संरक्षण समझौते (आईपीए) पर चल रही वार्ता को भी जल्द पूरा करने की जरूरत बताई, जिससे निवेशकों को मजबूत कानूनी ढांचा और अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भौगोलिक संकेतक (जीआई) समझौते को भी शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना चाहिए, जिससे दार्जिलिंग चाय जैसे भारतीय और रोकफोर्ट चीज़ जैसे यूरोपीय उत्पादों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

इस कार्यक्रम में एफटीए पर भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने कहा कि निवेश से जुड़े मुद्दों पर भविष्य में काम किया जाएगा।

भारत में करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं। यूरोपीय संघ 140 अरब यूरो से अधिक निवेश के साथ भारत में प्रमुख निवेशक है, जबकि यूरोप में भारतीय निवेश का स्तर 440 अरब यूरो है।

दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 190 अरब डॉलर से अधिक है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण