नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (पीएमजीकेएवाई) और अन्य योजनाओं के तहत मिलने वाले चावल में पोषक तत्व मिलाने (फोर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है।
सरकारी बयान के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि लंबे समय तक गोदामों में रखे रहने से चावल में मिलाए गए पोषक तत्वों में कमी पायी गयी।
यह फैसला आईआईटी खड़गपुर की एक रिपोर्ट के बाद लिया गया है।
सरकार ने आईआईटी खड़गपुर को यह पता लगाने का काम सौंपा था कि देश के अलग-अलग मौसम और माहौल वाले इलाकों में रखने पर यह खास चावल (फोर्टिफाइड चावल) कितने समय तक सुरक्षित रहता है और कितनी जल्दी खराब होता है।
अध्ययन में आया कि चावल रखने की जगह, तापमान, हवा में मौजूद उमस और पैकिंग का सामान ये सभी चीजें चावल की गुणवत्ता और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने पर बहुत बड़ा असर डालती हैं। इन्हीं कारणों की वजह से फोर्टिफाइड चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।
रिपोर्ट में पाया गया कि लंबे समय तक गोदामों में रखने और बार-बार यहां-वहां ले जाने से इस खास चावल में मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं और यह जल्दी खराब होने लगता है। इस वजह से चावल की गुणवत्ता उतने समय नहीं रह पाती जितनी उम्मीद की गई थी और जिस पोषण के लिए इसे बनाया गया था, उसका पूरा फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
चावल की खरीद और उसकी सालाना खपत को देखते हुए, राशन का चावल अक्सर सरकारी गोदामों में दो से तीन साल तक रखा रहता है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए हर साल 372 लाख टन चावल की जरूरत होती है। जबकि सरकारी भंडार में इसकी कुल उपलब्धता 674 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन की फसल भी शामिल है।
खाद्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘इन नतीजों को देखते हुए, यह फैसला लिया गया है कि चावल में पोषक तत्व मिलाने का काम फिलहाल रोक दिया जाए। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक पोषक तत्वों को लोगों तक पहुंचाने का कोई ज्यादा मजबूत और बेहतर तरीका तैयार नहीं हो जाता और उसे लागू नहीं कर दिया जाता।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘चावल में पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने के इस फैसले से लोगों को मिलने वाले राशन की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी। इससे सरकारी राशन की दुकानों आंगनवाड़ी सेवाओं या स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’
भाषा योगेश रमण
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