(ग्राफ के साथ)
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) देश का माल निर्यात फरवरी में सालाना आधार पर 0.81 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 36.61 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। व्यापार घाटा मासिक आधार पर घटकर 27.1 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।
पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव मार्च महीने के आंकड़ों में सामने आएगा क्योंकि युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। ये आंकड़े मई के मध्य तक जारी किए जाएंगे।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के बीच लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियों के कारण मार्च में निर्यात में गिरावट का रुझान देखने को मिलेगा।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में माल ढुलाई बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है जिससे हवाई एवं समुद्री माल ढुलाई में भी तेजी से वृद्धि हुई है।
फरवरी में सोने और चांदी के आयात में भारी वृद्धि के कारण आयात 24.11 प्रतिशत बढ़कर 63.71 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। सोने का आयात 218.55 प्रतिशत बढ़कर 7.44 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि चांदी का आयात 285.23 प्रतिशत बढ़कर 1.66 अरब डॉलर हो गया।
भारत मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड से सोने का आयात करता है जहां से फरवरी में आयात में 719.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2.71 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इसी महीने कच्चे तेल का आयात नौ प्रतिशत बढ़कर 12.97 अरब डॉलर हो गया।
व्यापार घाटा पिछले महीने की तुलना में कम हुआ है जो तब 34.68 अरब अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, फरवरी 2025 में दर्ज 14.05 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह घाटा सालाना आधार पर बढ़ा है।
व्यापार आंकड़ों पर मीडिया को जानकारी देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 माह (अप्रैल-फरवरी) में देश का निर्यात 1.84 प्रतिशत बढ़कर 402.93 अरब डॉलर रहा है। इसी अवधि में आयात भी 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीने की अवधि में माल व्यापार घाटा बढ़कर 310.60 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है जबकि 2024-25 की इसी अवधि में यह 261.80 अरब अमेरिकी डॉलर था।
अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न लॉजिस्टिक चुनौतियों की वजह से मार्च में निर्यात में गिरावट देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ …लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां हैं। जहाजों की आवाजाही… यहां तक कि हवाई माल ढुलाई को भी उड़ानों में व्यवधान के कारण कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, इसका कुछ प्रभाव पड़ेगा।’’
अग्रवाल ने कहा, ‘‘ उस क्षेत्र में भारतीय निर्यात प्रभावित होगा और भारत से उनका आयात भी प्रभावित होगा क्योंकि वे कई उत्पाद श्रेणियों के लिए भारत पर निर्भर हैं।’’
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इन चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार निर्यातकों से नियमित रूप से प्रतिक्रिया ले रही है और इन समस्याओं के समाधान के उपाय तलाश रही है।
कुल निर्यात आंकड़ों पर उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से’’, कुछ प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ संभावित निर्यात पर कम से कम कुछ प्रभाव तो पड़ेगा ही… कुल निर्यात के जो आंकड़े आप देख रहे हैं, उनमें माल एवं सेवाओं को मिलाकर लगभग 860 अरब डॉलर का निर्यात होने की उम्मीद है… मुझे पूरा विश्वास है कि हम सकारात्मक स्थिति में बने रहेंगे।’’
रूस से भारत के आयात के बारे में पूछे जाने पर सचिव ने कहा, ‘‘ हम रूसी तेल भी खरीद रहे हैं… मौजूदा चुनौतियों के कारण इस महीने भी रूसी तेल की खरीद में वृद्धि हुई है।’’
पेट्रोलियम, प्लास्टिक, वस्त्र, चमड़े के सामान, लौह अयस्क, मसाले, काजू, तेल खली, तिलहन और चाय जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्याम में फरवरी में गिरावट आई। हालांकि चावल, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, दवा, रसायन, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात बढ़ा।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सेवाओं का निर्यात 39.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं आयात 16.38 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर अग्रवाल ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर अमेरिकी शुल्क का नया ढांचा तय होने के बाद ही किए जाएंगे।
आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर सहित प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे माल भाड़ा लागत, बीमा प्रीमियम और पारगमन समय बढ़ गया है और निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।’’
भाषा निहारिका अजय
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