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नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को अर्थव्यवस्था की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) और स्वचालन जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना उनकी सरकार का मूल उद्देश्य है और शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल एवं संस्कृति जैसे क्षेत्र इसे साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा, “लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह इस सरकार का प्रमुख उद्देश्य एवं संकल्प है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) बाजार की मांग और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने की मजबूत आधारशिला प्रदान करती है, खासकर एआई, स्वचालन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में। हमें शिक्षा व्यवस्था को अर्थव्यवस्था की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज करना होगा।’’
उन्होंने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच संबंध का उल्लेख करते हुए एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग एवं कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र को बढ़ावा देने की भी जरूरत पर बल दिया।
भारत के नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ कदम बढ़ाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया, ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके।
उन्होंने कहा कि इस वेबिनार में परिसरों को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने पर मंथन होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने युवा शोधकर्ताओं को नवाचार और प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने वाली एक मजबूत शोध पारिस्थितिकी तैयार करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘‘ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां युवा शोधकर्ताओं को नए विचारों पर काम करने और प्रयोग करने का पूरा अवसर मिल सके।’’
मोदी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘‘इन क्षेत्रों में देश की बेटियों की बढ़ती रुचि उत्साहजनक है। आज जब हम भविष्य की प्रौद्योगिकियों की बात करते हैं तो यह महत्वपूर्ण है कि अवसरों की कमी के कारण कोई भी बेटी पीछे न रह जाए।’’
उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया गया है और आयुष्मान भारत योजना एवं आरोग्य केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।
मोदी ने ‘देखभाल सेवाओं से जुड़ी अर्थव्यवस्था’ का जिक्र करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशिक्षित देखभाल कर्मियों की मांग भी बढ़ेगी और इसके लिए नए प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज ‘रोकथाम आधारित और समग्र स्वास्थ्य’ की परिकल्पना पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया गया है और सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आयुष्मान भारत योजना और ‘आरोग्य मंदिर’ के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हर गांव तक हो गई है। हमारी योग और आयुर्वेद पद्धतियां भी दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की ‘युवा शक्ति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उसी स्थिति में ‘राष्ट्रीय शक्ति’ बनती है जब वह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरी हो।
उन्होंने कहा, ‘‘यही कारण है कि हाल के वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जाता रहा है।’’
उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ जैसी पहल से देश के खेल पारिस्थितिकी ढांचे में नई ऊर्जा आई है और देशभर में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
पर्यटन और संस्कृति के जरिये रोजगार सृजन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक स्थलों से आगे बढ़कर नए पर्यटन स्थलों का विकास करने से शहर की पहचान मजबूत होती है और उसके समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलता है।
इस वेबिनार में सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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