अगरतला, 24 जनवरी (भाषा) केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को अनुमान जताया कि नीतिगत सहायता और बुनियादी ढांचे के विकास के दम पर त्रिपुरा की अगरवुड (अगर की लकड़ी) आधारित अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में सालाना 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
वर्तमान में, इस पूर्वोत्तर राज्य में अगरवुड का वार्षिक व्यापार लगभग 100 करोड़ रुपये का है।
उत्तर त्रिपुरा जिले के फुलबारी में 80 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘अगरवुड क्लस्टर विकास परियोजना’ की आधारशिला रखने के बाद एक समारोह को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि डोनर मंत्रालय अगरवुड व्यापार की बाधाओं को दूर करने के लिए काम कर रहा है।
सिंधिया ने कहा, ‘पहली समस्या अगरवुड उत्पादों के निर्यात पर लगी सीमा की थी, जिसे व्यावहारिक तरीके से सुलझा लिया गया है। अगरवुड चिप्स के निर्यात की ऊपरी सीमा को राज्य के लिए 25,000 से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दिया गया है। इसी तरह, अगरवुड तेल के निर्यात की सीमा को भी 1,500 किलोग्राम से बढ़ाकर 75,000 किलोग्राम कर दिया गया है।’
उन्होंने कहा कि मंत्रालय अगरवुड आधारित उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक विभिन्न मंजूरियों की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि इसे सरल बनाया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगरवुड व्यापारियों को संभावित खरीदारों को नमूने दिखाने के लिए विदेश ले जाने की अनुमति दी जाएगी।
वर्तमान में सीमा शुल्क विभाग व्यापारियों को नमूने के रूप में अगरवुड उत्पाद ले जाने की अनुमति नहीं देता है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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